शाहीन बाग से पीएम मोदी को भेजा गया Valentine का न्योता, पैगाम में लिखा- तुम कब.....
नई दिल्ली। दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी दिल की शेप वाले कटआउट लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनपर लिखा है, 'पीएम मोदी कृपया शाहीन बाग आएं।' इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां आने और उनके साथ वेलेंटाइन डे मनाने का न्योता भी भेजा। कार्ड में प्रदर्शनकारियों ने लिखा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर गृहमंत्री अमित शाह हमसे बात करें। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को वापस लिए जाने की मांग को लेकर पिछले साल 15 दिसंबर से यहां विरोध प्रदर्शन जारी है।
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कार्ड में क्या लिखा है?
ये प्रदर्शनकारी पीएम मोदी के लिए 'प्यार वाला गीत' और एक 'सरप्राइज भेंट' भी पेश करेंगे। इसके लिए बकायदा प्रदर्शन स्थल पर पोस्टर लगाए गए हैं। साथ ही सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर भी इसे प्रसारित किया गया है। इसमें लिखा गया है, 'प्रधानमंत्री मोदी, कृपया शाहीन बाग आएं, अपना गिफ्ट लें और हमसे बात करें।'
'यहां आएं और हमसे बात करें'
इन प्रद्रर्शनकारियों में से एक सईद तसीर अहमद का कहना है, 'चाहे प्रधानमंत्री मोदी हों या गृहमंत्री अमित शाह हों या फिर कोई और, वो यहां आएं और हमसे बात करें। अगर वो हमें मना सकते हैं कि जो कुछ भी हो रहा है, वह संविधान के खिलाफ नहीं है, तो हम ये प्रदर्शन खत्म कर देंगे।' प्रदर्शनकारी ने आगे कहा, कि 'सरकार दावा कर रही है सीएए नागरिकता देने के लिए है और किसी की नागरिकता नहीं लेगा, लेकिन कोई स्पष्ट नहीं कर रहा है कि ये कैसे देश में मदद करेगा।'
दुकानें और फैक्ट्रियां बंद
शाहीन बाग में ये प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क पर टैंट लगाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये सड़क नोएडा को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली से जोड़ती है। जारी प्रदर्शन के कारण आसपास की सभी दुकानें और फैक्ट्रियां बंद हैं। लोगों को आने जाने के लिए दूसरी सड़क का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जहां अधिक समय लगता है। हालांकि यहां के प्रदर्शनकारी इस बात का दावा कर रहे हैं कि ये लोग स्कूल बस और एंबुलेंस को यहां से जाने दे रहे हैं।

सीएए क्या है?
सीएए बीते साल दिसंबर माह में आया था। इस कानून के तहत तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के उत्पीड़न के शिकार छह गैर मुस्लिम समुदाय (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इनके लिए भारत आने की समय सीमा 31 दिसंबर, 2014 रखी गई है। यानी जो इससे पहले भारत आया है और उत्पीड़न का शिकार है, उन्हें भारतीय नागरिकता मिल सकती है।
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