ओडिशा में low लिंगानुपात, पटनायक सरकार ने जन्म के समय लिंगानुपात को ठीक करने के लिए तैयार किया रोडमैप
ओडिशा में जन्म के समय कम लिंगानुपात ने पटनायक सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में घट गई है और गिरती प्रवृत्ति को रोकने और स्थिति में सुधार करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। मंगलवार को परिवार कल्याण निदेशक डॉ. बिजय पाणिग्रही ने जिला अधिकारियों से इस संबंध में बैठक की जिसमें उन्होंने बेटी बचाओ पहल को बढ़ावा देने और कन्या भ्रूण हत्या के जघन्य खतरे से निपटने के लिए सक्रिय और प्रभावी उपाय करने का निर्देष दिया है।

ओडिशा के बच्चों का लिंग अनुपात (child sex ratio) में वर्ष 1961 से गिरावट देखी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1961 में 1,000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 1,035 थी, वहीं 1971 में यह घटकर 1,020, 1981 में 995, 1991 में 967, 2001 में 953 और 2011 में 941 हो गई है।
रिपार्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ओडिशा में प्रति 1,000 लड़कों पर 894 लड़कियां जन्म लेती हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि खुर्दा, बालासोर, पुरी, अंगुल और जाजपुर जैसे शिक्षित, तुलनात्मक रूप से विकसित और औद्योगिक जिलों में लिंग अनुपात आदिवासी जिलों की तुलना में सबसे कम है।
स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. बिजय महापात्र ने राज्य में बच्चों के समय लिंगानुपात बढ़ने का कारण पर बात करते हुए कहा कि समाज के लोगों के दृष्टिकोण में परिर्वनत की आवश्यकता है। इसके साथ ही अनुपात में सुधार एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने गर्भ में कन्याओं की हत्या के जघन्य कृत्य में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
निदेशक नेक हा प्री-कंसेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निकल (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ उन्होंने कहा राज्य की ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और प्रयासों के बावजूद राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 के अनुसार, जन्म के समय बाल लिंग अनुपात 2015-2016 में 932 से घटकर 2019-2021 में 894 हो गया।












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