महागठबंधन की कोशिशों को लगा बड़ा झटका, कांग्रेस ने NCP का प्रस्ताव ठुकराया
नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष भाजपा के खिलाफ तमाम राजनीतिक दलों को एकजुट करने में जुटा है और गठबंधन बनाने की कोशिश में जुटा है। लेकिन इस कोशिश को महाराष्ट्र में झटका लगा है। दरअसल महाराष्ट्र में एनसीपी ने प्रस्ताव दिया था कि महागठबंधन में मनसे को भी शामिल किया जाए, लेकिन कांग्रेस ने महागठबंधन में मनसे को शामिल करने से इनकार कर दिया है। एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। हमे लगता है कि सभी दलों को मोदी-भाजपा के खिलफा एकजुट होना चाहिए और महागठबंधन का निर्माण करना चाहिए, एक-एक वोट कीमती है।

मनसे की राजनीतिक कांग्रेस से अलग
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने कहा कि राज ठाकरे की पार्टी के साथ जाने का सवाल नहीं उठता है। राज ठाकरे की राजनीति कांग्रेस के विचारों से बिल्कुल अलग है, ये लोग संविधान में भरोसा नहीं करते हैं, मनसे की राजनीति जाति, संप्रदाय पर आधारित है, ये लोगों को पीटते हैं। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते हुई बैठक में एनसीपी ने यह प्रस्ताव सामने रखा था, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कांग्रेस का तर्क था का मनसे के साथ गठबंधन की वजह से हमे यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली के चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मनसे का निराशाजनक प्रदर्शन
गौर करने वाली बात यह है कि 2014 में मनसे का प्रदर्शन काफी खराब था, यही नहीं विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की प्रदर्शन बेकार था और पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। लेकिन एनसीपी नेताओं का तर्क था का राज ठाकरे पीएम मोदी के खिलाफ काफी खुलकर बोलते हैं, भाजपा सरकार की जमकर आलोचना करते हैं। एनसीपी नेता ने कहा कि राज ठाकरे के अंदर खास काबिलियत है कि वह लोगों के बीच अपनी बात को काफी मजबूती के साथ रखते हैं।

छोटे दलों की खींचतान
इन सब के बीच स्वाभिमानी सेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी भरीप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। 6 अक्टूबर को होने वाली मुलाकात से पहले राजू शेट्टी ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी को बड़ा दिल दिखाना चाहिए और छोटे दलों को साथ लेकर चलना चाहिए। बीबीएम से मुलाकात की बात की पुष्टि करते हुए शेट्टी ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी को हमे हल्के में नहीं आंकना चाहिए, इन लोगों को नए दोस्त बनाने के लिए एक कदम पीछे हटने की जरूरत है। ये छोटे दल अपने वोट बैंक को कांग्रेस-एनसीपी की ओर मोड़ेंगी, लिहाजा छोटे दलों को भी महत्ता देने की जरूरत है।
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