सेंथिल बालाजी की बर्खास्तगी पर लगी रोक, फिर भी राज्यपाल पर टूट पड़ा पूरा विपक्ष, जानें किस पार्टी ने क्या कहा
Senthil Balaji Dismissal: तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल आरएन रवि के बीच गुरुवार शाम को उस समय विवाद बढ़ गया जब राज्यपाल आरएन रवि ने गिरफ्तार मंत्री सेंथिल बालाजी को उनके खिलाफ आपराधिक आरोपों के कारण मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। करीब पांच घंटे बाद गवर्नर हाउस ने जानकारी दी कि बर्खास्तगी का फैसला कुछ समय के लिए रोक दिया गया है और आरएन रवि अब अटॉर्नी जनरल से सलाह लेंगे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल को किसी मंत्री को बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है और डीएमके-कांग्रेस सरकार कानूनी रूप से इसका सामना करेगी।
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने बोला हमला
वहीं बर्खास्तगी पर रोक लगने के बाद अन्य विपक्षी पार्टियां भी राज्यपाल पर तंज कसा है। कांग्रेस सांसद और वकील मनीष तिवारी ने कहा कि राष्ट्रपति को तमिलनाडु के राज्यपाल को बर्खास्त कर देना चाहिए क्योंकि कोई भी वकील आरएन रवि को किसी मंत्री को तब तक बर्खास्त करने की सलाह नहीं दे सकता जब तक कि उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हो जाते। मनीष तिवारी ने कहा कि कोई भी समझदार नौकरशाह और यहां तक कि कोई समझदार वकील भी राज्यपाल आरएन रवि को यह सलाह नहीं दे सकता था कि संवैधानिक योजना उन्हें एक मंत्री को बर्खास्त करने की अनुमति देती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 का हवाला देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि किसी मंत्री को केवल मुख्यमंत्री की सलाह पर ही हटाया जा सकता है।

आम आदमी पार्टी ने क्या कहा?
आम आदमी पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि राज्यपाल आरएन रवि की कार्रवाई पूरी तरह से असंवैधानिक है और ये निर्णय मुख्यमंत्री के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
टीएमसी हुआ हमलावर
तृणमूल के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 164 के अलावा, सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है कि राज्यपाल मुख्यमंत्रियों से परामर्श किए बिना अपने संवैधानिक कार्य का निर्वहन नहीं कर सकते हैं। टीएमसी नेता ने कहा कि इस मामले में, यह स्पष्ट है कि राज्यपाल ने एकतरफा फैसला लिया। यह लड़ाई सभी विपक्षी दलों की है - हमारे संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए।
आरजेडी बोली- दिल्ली से फरमान मिला होगा
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि आरएन रवि को दिल्ली से फरमान मिला होगा। लेकिन संविधान में ऐसी कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, भाजपा ने कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि राज्यपाल के पास सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है और उन्होंने इसके कारण भी बताए।












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