बुजुर्ग मां-बाप को नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

नई दिल्ली। बूढ़े मां-बाप को बोझ समझकर उन्हें दर-दर की ठोकरे खाने के लिए सड़कों पर छोड़ देने वाले बच्चों की अब खैर नहीं है। जी हां केंद्र की मोदी सरकार के इरादे कुछ यही इशारा करते हैं। अगले साल मार्च माह तक केंद्र सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए नया कानून लाने जा रही है। जिससे वरिष्ठ नागरिकों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके और न्याय के इंतजार के लिए उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़े।

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सामाजिक न्याय मामलों के केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों को और वैधानिक सुरक्षा देने के लिए जल्द ही नया कानून लाने जा रही है। इस कानून का मुख्य मकसद वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान के साथ सुखी और स्वस्थ्य जीवन को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए मार्च, 2015 तक इस कानून में ऐसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा जिससे वरिष्ठ लोगों के जीवन को और सुखमय बनाया जा सके।

इस कानून में वरिष्ठ नागरिकों के मामलों का जल्द निपटारा करके उन्हें न्याय दिलाया जा सके। हालांकि थावर चंद ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहले से ही कानून मौजूद है लेकिन इसे और सुगम बनाने के लिए इस कानून को लाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि आजकल के बच्चों को अपने मा-बाप को देखभाल करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

वहीं सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के सचिव सुधीर भार्गव का कहना है कि देश में 80 वर्ष से उपर के नागरिकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है ऐसे में इन नागरिकों की देखभाल करने वाले लोगों की देश को बहुत आवश्यकता है। यही नहीं खासकर 80 वर्ष से उपर के बुजुर्गों की सेवा के लिए अनुभवी, कुशल और सच्चे मन से सेवा करने वाले लोगों की देश को जरूरत है। उन्होंने कहा अगर देश में बढ़ रही जनसंख्या पर नजर डाले तो 80 वर्ष के उपर वाले लोगों की जनसंख्या सबसे अधिक बढ़ रही है।

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