'ये तो सेबी वाले ढीले हैं, किसी और देश में होते तो ठोक दिया होता', हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर हरिश साल्वे की फटकार
Harish Salve On Hindenburg Report: अपनी रिपोर्ट के जरिए अडानी ग्रुप को लेकर किए खुलासे के बाद भारत के शेयर मार्केट में तहलका मचाने वाली अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग (Hindenburg) की लेटेस्ट रिपोर्ट का इस बार खासा असर नहीं पड़ा। भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के पहले दिन हिंडनबर्ग की दूसरी रिपोर्ट को नकार दिया।
अपने नए खुलासे में एक बार फिर अडानी ग्रुप को घेरने वाले और सेबी प्रमुख माधबी बुच और उनके पति धवल बुच को लेकर दावा किया गया है कि उनके अडानी से जुड़ी ऑफशोर फर्मों में उनकी हिस्सेदारी हैं। ऐसे में इस पूरे मामले पर देश के जाने-माने वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने अपनी बात रखी है।

भारत का मजाक बनाया जा रहा-साल्वे
एनडीटीवी से बात करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने हिंडनबर्ग रिसर्च जैसे फर्म के बारे में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर इन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो ये एक दिन देश की न्यायपालिका पर सवाल उठाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि भारत का मजाक बनाया जा रहा है।
'अब तक ठोक दिया होता'
साल्वे ने कहा कि हिंडनबर्ग अमेरिका में भी बदनाम है, लेकिन हम इसे यहां विश्वसनीयता दे रहे हैं। न्यूज चैनल से बात करते हुए हरीश साल्वे ने कड़े शब्दों में कहा कि सेबी ढीली है, किसी और देश में होते तो अब तक इनको ठोक दिया होता।
सेबी को झटका लगा अच्छा है-साल्वे
उन्होंने कहा कि आजकल ट्रेडिंग ऑनलाइन होती है। पता करो ना की किसने दो महीने में शेयर बेचे और किस प्राइज पर बेचे। शॉर्ट्स सेलिंग मुश्किल काम नहीं है। महीने भर में आसानी से निकल आती है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि यह अच्छा हुआ है कि सेबी को झटका लगा है। क्योंकि अब उनको इंक्वायरी खत्म कर देनी चाहिए थी।
अपने बयान में हरिश साल्वे ने कहा, "किसी दूसरे देश में लोगों ने ये कहा होता कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट कूड़ेदान में डालने के लायक है। हिंडनबर्ग सेबी को डराने की कोशिश कर रहा है। भारत में मानहानि के लिए एक न्यायाधिकरण होना चाहिए। ऐसे निकाय न्यायाधीशों को भी नहीं बख्शेंगे।"












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