ओडिशा रेल दुर्घटना: सीट की अदला-बदली ने बचाई पिता-पुत्री की जान, बेटी 'विंडो सीट' पर बैठने की कर रही थी जिद

Coromandel Express Accident: ओडिशा में हुई ट्रेन दुर्घटना के बाद अब ऐसे लोगों की कहानी भी सामने आ रही है जिन्होंने किस्मत के सहारे मौत को मात दे दी। एक ऐसे ही पिता-पुत्री की कहानी सामने आई है।

Odisha Train Accident Father Daughter

Seat Swap In Coromandel Express: 'जाको राखे साइयां मार सके न कोई' यह कहावत 2 जून को हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना में चरितार्थ हो गई। पिता और पुत्री किस्मत वाले थे कि उनकी जान बच गई। पुत्री अगर जिद न करती तो शायद पिता और बेटी आज अपने परिवार के बीच नहीं होती। जी हां यह अक्सर हम सभी के परिवार में होता है कि यदि आप बच्चों के साथ ट्रेन में सफर कर रहे होते हैं तो बच्चे की जिद होती है कि उसे विंडो सीट पर बैठनी है ताकि बाहर का नजारा दिखाई पड़ सके। ऐसा ही कुछ मामला इस बार हुई ट्रेन दुर्घटना में देखने को मिला। जानिए कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार एक पिता-पुत्री की जान कैसे बच गई।

चलिए समझते हैं क्या है मामला?
दरअसल, एक पिता अपनी 8 साल की बच्ची के साथ खड़गपुर से कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुए थे और कटक जा रहे थे। शनिवार (3 जून) को दोनों पिता-पुत्री को डॉक्टर से मिलने जाना था और इसी सिलसिले में वे लोग यात्रा कर रहे थे। बच्ची के पिता ने बताया कि उन्होंने थर्ड एसी कोच में सफर करने की टिकट लिया था और दोनों उस कोच में बैठ भी गए लेकिन कुछ ही देर में उनकी बेटी ने खिड़की वाली सीट के पास बैठने की जिद कर दी। पिता बार-बार समझाने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें यही सीट मिली है वह दूसरी सीट पर नहीं बैठ सकते। लेकिन बच्चों की जिद तो हम सभी जानते हैं कैसी होती है उसे वह खिड़की वाली सीट ही चाहिए थी। फिर क्या था पिता मजबूर होकर सभी कोच में चक्कर लगाने लगे कि कोई विंडो सीट दे दे। कई जगह तो उन्हें लोगों ने मना भी कर दिया। लेकिन एक जगह दो व्यक्ति इसके लिए मान गए और उन्होंने सीट बदलने पर सहमति जता दी। फिर क्या था पिता ने पुत्री से कहा कि चलो विंडो सीट मिल गई है। इतना सुनते ही बच्ची बेहद खुश हो गई और पिता के साथ सामान लेकर तेजी से उस बोगी की तरफ चली गई।

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    जानें फिर क्या हुआ?
    जिन दो लोगों ने सीट एक्सचेंज की थी वह पिता-पुत्री की सीट पर आ गए और आराम फरमाने लगे। लेकिन थोड़ी देर बाद वह हुआ जिसका किसी को अंदाजा नहीं था। शाम के 7 बजकर 10 मिनट पर जोर की आवाज हुई और सब खत्म। जिस बॉगी से पिता-पुत्री उठ कर दूसरे में गए थे वह बोगी दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस बोगी में कई लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि उन दोनों शख्स की भी जान चली गई। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन उस पिता-पुत्री की किस्मत कहिए या बच्ची की जिद कहिए दोनों की जान बच गई।

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