SC ने JK सरकार को लगाई फटकार, कहा- क्यों नहीं करा देते शराब की होम डिलीवरी?

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर स्थित शराब की दुकानों का बचाव कर रहे राज्य सरकारों को सर्वोच्च न्यायालय ने फटकार लगाई है।

नई दिल्ली। 'शराब की होम डिलीवरी क्यों नहीं शुरू कर दी जाती।' यह तंज सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू और कश्मीर के वकील की दलील पर कसा।

दरअसल, बुधवार (7 दिसंबर) को सर्वोच्च न्यायालय में उस मामले पर सुनवाई की जा रही थी, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से शराबा की दुकान हटाए जाने की बात कही गई थी।

सुवाई के दौरान शराब कारोबारियों की दलीलों से न्यायालय नाराज हो गया। इस दौरान न्यायालय ने पंजाब सरकार को राजमार्गों पर शराब की बढ़ रही दुकानों पर डांट लगाई। न्यायालय ने मामले में बुधवार को सभी पक्षों को सुनकर फैसला सुरक्षित रखा है।

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टीएस ठाकुर कर रहे थे पीठ की अगुवाई

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अगुवाई वाली पीठ कर रही थी।

मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू और कश्मीर के शराब व्यापारी संघ के वकील ने कहा कि उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इस तरह से है कि अगर मौजूदा दुकानें हटा दी गईं तो उन्हें सही जगह नहीं मिल पाएगी।

वकील ने पहाड़ी इलाके की बात करते हुए कहा कि दुकाने हटाए जाने से ये लोगों की पहुंच से दूर हो जाएंगी। लोगों को इसके लिए बहुत दूर तक चलना पड़ेगा।

क्यों नहीं करते शुरू होम डिलीवरी

वकील की इन दलीलों पर बिफरे न्यायाधीश टीएस ठाकुर की पीठ ने कहा कि फिर शराब की होम डिलीवरी क्यों नहीं शुरू कर दी जाती?

वहीं पंजाब सरकार के वकील निखिल नायर ने न्यायालय से कहा कि दुकानों के राजमार्गों से हटने पर 1,000 करोड़ का नुकसान होगा, जिस पर पीठ ने डांटते हुए कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार हर साल दुकानें बढ़ा रही है।

हर साल हो रही है डेढ़ लाख लोगों की मौत

कहा कि इससे आबकारी विभाग और मंत्री खुश होंगे लेकिन हर वर्ष सड़क दुर्घटना में डेढ़ लाख लोगों की मौत हो रही है। प्रति किलोमीटर पर शराब की दुकान है।

इसके बाद पंजाब सरकार के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि शराब की दुकानों को हटाने का आजदेश 2017 से लागू की जाए,अन्यथा राजस्व का बड़ा नुकसान होगा।

इस मामले में पंजाब और जम्मू कश्मीरी के साथ-साथ हरियाणा, तमिलनाडु और पुडूचेरी भी न्यायालय के समक्ष मौजूद रहे।

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