विक्टोरिया गौरी की मद्रास हाई कोर्ट में अडिशनल जज की नियुक्ति नहीं होगी खारिज, SC ने दी ये दलील

विक्टोरिया गौरी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार। कोर्ट ने कहा कि उनके अडिशनल जज बनने को रद्द नहीं कर सकते हैं।

Justice Gowri

वरिष्ठ वकील लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विक्टोरिया गौरी की नियुक्ति को रद्द किए जाने की अपील को खारिज कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि 10.30 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और 10.35 पर विक्टोरिया गौरी ने मद्रास हाई कोर्ट में बतौर अडिशनल जज की शपथ ग्रहण कर ली। अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई तय समय से पहले की है। गौरी को जज बनाए जाने के फैसले के खिलाफ मद्रास हाई्र कोर्ट के 22 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमे कहा गया है कि गौरी भाजपा नेता हैं, लिहाजा उन्हें जज बनाकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सही नहीं ठहराया जा सकता है। दरअसल विक्टोरिया गौरी ने इस्लाम और ईसाई धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने इस्लाम को हरा आतंक तो ईसाई धर्म को सफेद आतंक बताया था। उन्होंने कहा था कि सफेद आतंक हरे से ज्यादा खतरनाक है।

22 मिनट चली सुनवाई, याचिका रद्द

इस पूरे मामले की सुनवाई तकरीबन 22 मिनट चली। इस दौरान एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी तो दूसरी तरफ मद्रास हाई कोर्ट में गौरी ने बतौर अडिशनल जज शपथ ली। 10.30 पर मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट राजू ने कहा कि 10.35 पर गौरी शपथ लेने वाली हैं, ऐसे में पांच मिनट पहले इस सुनवाई से क्या फर्क पड़ेगा, क्या सुप्रीम कोर्ट 5 मिनट में अपना फैसला सुना देगा।

योग्यता और उपयुक्तता में फर्क

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पात्रता और उपयुक्तता में फर्क है। उपयुक्तता को कोर्ट तय नहीं कर सकता है। अगर इसमे उलझेंगे तो जजों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया ही बेकार हो जाएगी। लिहाजा हमे योग्यता के आधार पर ही बात करनी चाहिए और इसी पर बहस भी होनी चाहिए। जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि इस तरह के कई मामले हैं जब राजनीतिक परिवेश से आने वाले लोगों का चयन हुआ है। जिन बयानों का जिक्र हो रहा है वह 2018 के भाषण के अंश हैं और कॉलेजियम ने उसे देखा होगा, इसके बाद ही विक्टोरिया गौरी के नाम का सुझाव दिया गया होगा।

पॉलिटिकल बैकग्राउंड मुद्दा नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कॉलेजियम को यह नहीं कह सकते हैं कि विक्टोरिया गौरी से जुड़े अपने सुझाव पर पुनर्विचार करें। इस तरह के कई मौके हैं जब अडिशनल जज को स्थायी नहीं किया गया, अगर उनका काम संतोषजनक नहीं रहा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी की मद्रास हाई कोर्ट में अडिशनल जज के तौर पर नियुक्ति की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि मैं भी राजनीतिक बैकग्राउंड से आता हूं, जज बनने से पहले मेरा भी बैकग्राउंड राजनीतिक था, लेकिन पिछले 20 साल से मैं जज हूं और इसमे मेरा पॉलिटिकल बैकग्राउंड कभी भी बाधा नहीं बना।

समय से पहले हुई सुनवाई

गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले पर सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई पहले 10 फरवरी को होनी थी, लेकिन एडवोकेट राजू ने अपील की थी कि इसकी सुनवाई जल्दी की जाए, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने हामी भरते हुए आज सुनवाई शुरू कर दी है। जिन वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है उन्होंने इस मामले पर राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने अपनी-अपनी टिप्पणी इसपर की। वहीं एडवोकेट रामचंद्रन इस मामले पर अपनी दलील रखी।

क्या कहा राजू रामचंद्रन ने

राजू रामचंद्रन ने अपील की थी कि कॉलेजियम के सुझाव को दरकिनार किया जाए और गौरी की नियुक्ति को रोका जाए। जो भी बतौर जज शपथ ग्रहण करता है उसे देश के संविधान में भरोसा होना चाहिए। जिस तरह से सामान्य जीवन में विक्टोरिया गौरी ने बयान दिए हैं वह कतई इससे इतर हैं।

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