उमर अब्दुल्‍ला का पत्‍नी पायल के साथ चल रही तलाक की लड़ाई में आया बड़ा मोड़, SC ने दिया ये आदेश

Omar Abdullah wife Payal divorce Case: जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे कश्‍मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्‍ला का पत्‍नी पायल से चल रही तलाक की लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्‍ला और उनकी पत्‍नी पायल को मध्‍यस्‍थता केंद्र में मध्‍यस्‍थता के लिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

बता दें सुप्रीम कोर्ट का ये निर्देश ऐसे समय में आया है जब जम्‍मू-कश्‍मीर में सालों बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और उमर अब्दुल्‍ला स्‍वयं और अपनी पार्टी नेशलन कान्‍फ्रेंस को जीत हासिल कर कश्‍मीर की सत्‍ता अपने हाथों में लेना चाह रहे हैं।

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उमर अब्दुल्‍ला ने खुद मांगा था तलाक

बता दें सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश उमर अब्दुल्‍ला के साथ पत्‍नी पायल के साथ तलाक के लिए चल रही लंबी मुकदमेबाजी के बाद आया है। उमर ने अपने से अलग रह रही पत्‍नी पायल के साथ शादी टूटने का हवाला देते हुए , पत्‍नी की कू्ररता के आधार पर कोर्ट में तलाक मांगा था।

उमर अब्दुल्‍ला और पायल की कब हुई थी शादी?

बता दें उमर अब्दुल्‍ला ने पायल से 1 सितंबर से 1994 में शादी की थी और कोर्ट में तलाक की याचिका में उमर ने दावा किया था कि वो और उनकी पत्‍नी 2009 से अलग रह रहे हैं और 2007 के बाद से उन्‍होंनें वैवाहिक संबंध नहीं साझा किया।

उमर अब्दुल्‍ला ने पत्‍नी पायल पर याचिका में लगाए थे क्‍या आरोप?

  • उनकी शादी प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी,
  • जारी कानूनी बंधन अनुचित कठिनाई का कारण बन रहा था।
  • पायल अब्दुल्ला का आचरण अनुचित था,
  • पत्‍नी के खराब आचण के कारण मेरा उत्पीड़न हुआ
  • "क्रूरता" और "परित्याग" के आधार पर तलाक दिया जाए

2023 में उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज

दिसंबर 2023 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने 2016 के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसने तलाक देने से भी इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि क्रूरता के आरोप "अस्पष्ट और अस्वीकार्य" थे और उमर अब्दुल्ला पायल के किसी भी व्यवहार का सबूत देने में विफल रहे थे जिसे शारीरिक या मानसिक क्रूरता माना जा सकता था।

कोर्ट ने पत्‍नी पायल को गुजारा भत्‍ता देने का दिया था आदेश

अगस्त 2023 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल को मासिक अंतरिम गुजारा भत्ता के रूप में ₹1.5 लाख और उनके दो बेटों, जो वर्तमान में लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी पढ़ाई के लिए 60,000 रुपये देने का आदेश दिया था।

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