ब्लॉग लिखने पर पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटूज को सुप्रीम कोर्ट ने दी अवमानना की नोटिस

पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने बलात्कार के मामले पर आए फैसले के संबंध में ब्लॉग लिखा था।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू के खिलाफ अवमानना ​​नोटिस जारी किया है। काटजू पर आरोप है कि उन्होंने न्यायालय के न्यायधीशों को आघात पहुंचाया है।

कोर्ट ने काटजू को यह नोटिस उनके ब्लॉग पर दिया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर न्यायाधीशों के खिलाफ अनर्गल भाषा का इस्तेमाल किया था।

इस मामले पर काटजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को इस तरह से व्यवहार नहीं करना चाहिए। यह नोटिस मेरे लिए एक धमकी की तरह है।

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बता दें कि केरल के चर्चित सौम्या मर्डर केस में दोषी गोविंदाचामी की फांसी की सजा रद्द करने को एक गलत फैसला बताने पर बताने पर पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सुप्रीम कोर्ट ने समन किया था।

केस की सुनवाई कर रही तीन न्यायाधीशों की बेंच ने नोटिस में कहा था कि काटजू कोर्ट में पेश होकर अपनी बात रखें।

केरल सरकार और सौम्या की मां ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर रिव्यू पिटीशन फाइल की थी। जिस पर 11 नवंबर को सुनवाई होनी थी।

काटजू ने सौम्या के मर्डर पर फैसला आने के बाद अपनी ब्लॉग सत्यम ब्रूयात और फेसबुक पोस्ट में कहा था कि मैंने फैसले को पढ़ा है, इसमें कई खामियां हैं।

उन्होंने लिखा था कि गोविंदाचामी को मर्डर के चार्ज से बरी करना बड़ी गलती है। काटजू के ब्लॉग को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें समन जारी करते हुए कहा था कि कोर्ट में आकर बहस करें और हमें बताएं कि फैसला कैसे गलत है।

गौरतलब है कि ये ऐसा पहला मामला था जब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को कोर्ट ने इस तरह से समन जारी किया हो।

ये है मामला

1 फरवरी 2011 को 23 साल की सौम्या पैसेंजर ट्रेन से एर्णाकुलम से शोरनूर जा रही थी। गोविंदाचामी सौम्या को खाली पड़े महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे में ले गया।

वहां उसने उसके साथ लूटपाट की, सौम्या के विरोध करने पर उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंका इसके बाद गेविंदाचामी खुद भी ट्रेन से कूद गया और सौम्या के साथ रेप किया।

15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने गोविंदाचामी को मर्डर केस में बरी कर दिया, उसे सिर्फ रेप का दोषी माना और 7 साल की सजा सुनाई। ऐसा सबूत की कमी की वजह से हुआ था।

इस फैसले को लेकर सौम्या की मां ने नाराजगी जताई थी और केस के रिव्यू के लिए पिटीशन दायर की थी, जिसपर 11 नवंबर को सुनवाई होगी। फैसले पर काटजू ने भी अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए असंतोष जाहिर किया था।

ये लिखा था काटजू ने

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