मुसलमानों के खिलाफ लिंचिंग के मामलों में वृद्धि पर सुप्रीम कोर्ट हुआ चिंतित, जारी की नोटिस

Lynching against Muslims: सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका को संज्ञान में लेते हुए देश में मुसलमानों क खिलाफ लिजिंग और भीड़ हिंसा के मामलों में हो रही खतरनाक वृद्धि पर चिंता जताई है। इसके साथ ही सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने इसको लेकर केंद्र सरकार और कई राज्‍यों के पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी किया है।

lynching against Muslims

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन द्वारा दायर एक जनहित याचिका की जांच करने का निर्णय लिया है। इस याचिका में बताया गया है कि स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद "मुसलमानों के खिलाफ लिंचिंग और भीड़ हिंसा के मामलों में खतरनाक वृद्धि हो रही है, इसके साथ ही याचिका में इसके मद्देनजर तत्काल हस्तक्षेप करने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी।

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया कि 17 जून, 2023 को ओडिशा के भुवनेश्वर में एक हिंदू भीड़ ने दो मुस्लिम युवकों पर हिंसक हमला किया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मुसलमानों के खिलाफ लिचिंग और भीड़ हिंसा की घटनाओं में चौंकाने वाली वृद्धि" का दावा करने वाली याचिका पर जांच करने का फैसला लेते हुए केंद्र और उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा के पुलिस प्रमुखों को शुक्रवार को नोटिस जारी की है।एनएफआईडब्लू को ओर से इस याचिका की पैरवी कर रहे अधिवक्‍ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि सभी हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना बेकार होगा यदि उन्‍हें संबंधित न्‍यायालल भेजा जाता है और वहां पर पीडि़तों को कुछ भी नहीं मिलेगा।

तहसनीन पूनावाला केस के फैलले का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा इस फैसले के बावजूद ये सब हो रहा है तो ऐसे में हम कहां जाए।

कपिल सिब्बल की दलालें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच करवाने का निर्णया लिया और केंद सरकार और राज्‍य सरकारों को इसके संबंध में दिशानिर्देश जारी किया।

इस याचिका में दावा किया गया कि मुस्लिम समुदाया के विरुद्ध लिलिंग और भीड़ हिंसा के मामलों में बहुत वृद्धि हो रही है रही जिसको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट तत्‍काल कार्रवाई करने के लिए संबंधित राज्‍य के अधिकारियों को परमादेश की प्रकृति में एक रिट की डिमांड कर रहा है

इस याचिका को एडवोकेट सुमित हजारिका, और रश्मि सिंह ने दायर की है जिसमें मॉब लिचिंग औ मॉब हिंसा के खबरत को रोकने के लिए राज्‍य मशीनरी तंत्र को पूरी तरह से फेल बताते हुए तत्‍काल राहत की मांग की गई थी।

बता दें सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस जनहित याचिका में बिहार के सारण जिले में 23 जून 2023 की लिचिंग की घटना का जिक्र किया गया है। जिसमें एक 55 वर्षीय ट्रक ड्राइवर को गोमांस ले जाने के शक में भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला गया।

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