अयोध्या में राम मंदिर के नीचे मिली सरयू की धारा, जानिए क्या हो सकते हैं विकल्प ?
नई दिल्ली- अयोध्या में राम मंदिर (Ram Temple in Ayodhya) निर्माण के रास्ते में एक बहुत बड़ी बाधा खड़ी होती दिखाई दे रही है। जिस जगह पर भगवान राम का मंदिर (Ram Temple) बनना है, उसके नीचे खुदाई के दौरान सरयू नदी की एक धारा (Saryu stream) मिली है। इस स्थिति में वहां मंदिर का फाउंडेशन तैयार करना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। फिलहाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janambhoomi Teertha Kshetra trust) ने इसके लिए आईआईटी (IIT) वैज्ञानिकों से मदद मांगी है। बता दें कि 15 जनवरी से मंदिर निर्माण का काम शुरू होना था, लेकिन अब जबतक नई समस्या का समाधान नहीं मिल जाता, आगे बढ़ना मुश्किल है।

मंदिर निर्माण समिति ने मांगी आईआईटी की सलाह
अयोध्या में भगवान राम मंदिर ट्रस्ट ने आईआईटी के वैज्ञानिकों से मंदिर निर्माण के लिए बेहतर मॉडल तैयार करने में सलाह मांगी है। क्योंकि, जिस जगह पर मंदिर का फाउंडेशन खड़ा होना है, सूत्रों के मुताबिक उसके नीचे सरयू नदी की एक धारा (Saryu stream)पाई गई है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा (prime minister Nripendra Misra) की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति ने मंगलवार को आपस में मंथन किया है। जानकारी के मुताबिक चर्चा में यह बात निकल कर गई है कि मंदिर के नीचे से सरयू की धारा की मौजूदगी मौजूदा मॉडल के मुताबिक फाउंडेशन के लिए उपयुक्त नहीं होगा।
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2023 तक मंदिर बनाने का लक्ष्य
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janambhoomi Teertha Kshetra trust) ने मंदिर के मजबूत फाउंडेशन तैयार करने के लिए बेहतर मॉडल का विकल्प सुझाने के लिए आईआईटी से आग्रह किया है। ऐसे में जबकि राम मंदिर (Ram Temple) को निर्माण 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, फाउंडेशन के काम में आ रही रुकावट के चलते उसमें देर होने की आशंका बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक अभी भी इस समस्या का समाधान ढूंढ़ने के लिए आआईटी-मद्रास, आईआईटी-मुंबई, आईआईटी-कानपुर,आईआईटी-दिल्ली,आईआईटी-गुवाहाटी और सीबीआरआई रूड़की के मौजूदा और रिटायर्ड एक्सपर्ट माथा खपा रहे हैं।

फिलहाल क्या हो सकते हैं विकल्प ?
फिलहाल जो जानकारी मिली रही है उसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट की निर्माण समिति पैदा हुई समस्या के समाधान के लिए दो विकल्पों को ध्यान में रखकर चर्चा में जुटी हुई है। एक तो राफ्ट को सहारा देने के लिए विब्रो पत्थर के स्तंभों (vibro stone columns) का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसके ऊपर पत्थर डाले जा सकें; और दूसरा इंजीनियरिंग के इस्तेमाल से वहां की मिट्टी की पकड़ को मजबूत करना, ताकि ऐसा फाउंडेशन तैयार हो जो कम से कम 1,000 साल तक निर्वाध रूप से खड़ा रहे और बड़े से बड़े भूकंप भी उसका बाल बांका ना कर सकें। दरअसल, इस गंभीर समस्या का पता तब चला है, जब सॉइल टेस्टिंग के लिए पिलर डाले जा रहे थे तो करीब 200 फीट नीचे रेतीली जमीन मिली।

गर्भगृह के ठीक पश्चिम से गुजर रही है सरयू की धारा
कुछ दिन पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि 'हमने 1,200 पिलर की ड्रॉइंग के मुताबिक परीक्षण किया। विशेषज्ञों ने कुछ पिलर को सतह से करीब 125 फीट नीचे डाला और फिर 28 दिन बाद दोबारा टेस्ट किया, जो कि इंजीनियरिंग के लिहाज से तय की गई सबसे कम निर्धारित दिन हैं। उसपर 700 टन वजन डालकर भूकंप की परिस्थितियां पैदा की गईं। जांच के नतीजे जरूरत के हिसाब से नहीं आए। मशीनों की रीडिंग हमारी उम्मीदों से काफी अलग थी। इसलिए हम निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ा सकते। ' इसकी वजह ये है कि सरयू नदी की धारा गर्भगृह के ठीक पश्चिम से गुजर रही है।

5 अगस्त को पीएम मोदी ने किया था भूमिपूजन
अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए जो डिजाइन तैयार की गई है, उसमें करीब 1,200 कंक्रीट पिलर इस्तेमाल होने हैं, जिनकी मोटाई करीब 1 मीटर की होगी। ये पिलर जमीन के 20 से 40 मीटर तक नीधे धसी होंगी। इसके ऊपर सीमेंट की कंक्रीट राफ्ट तैयार की जाएगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक 15 जनवरी से मंदिर में फाउंडेशन का काम शुरू हो जाना था। लेकिन, नई अड़चन की वजह से जब तक समाधान नहीं निकलेगा, मंदिर निर्माण का काम शुरू होना मुश्किल नजर आ रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)ने इस साल 5 अगस्त को ही राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन और शिलान्यास का कार्य संपन्न किया था।












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