Sanitary Pads से बढ़ा कैंसर-बांझपन का खतरा? नई स्टडी में डराने वाला खुलासा
Sanitary Pads Increased cancer?: सैनिटरी पैड आज हर महिला और लड़की की जरूरत है, महीने की उन मुश्किल दिनों में हर लड़की और महिला को साफ-सफाई के विशेष ध्या्यान की जरूरत होती है। ऐसे में सैनिटरी पैड उनके पास बढ़िया विकल्प होता है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम लंबे वक्त से चले आ रहे हैं लेकिन हाल ही में हुए एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक की स्टडी में सैनिटरी नैपकिन को लेकर जो कुछ भी कहा गया है, वो निश्चित तौर पर डराने वाला है, शोध में कहा गया है कि 'सैनिटरी पैड में हानिकारक रसायन होते हैं, जिसकी वजह से महिलाओं में कैंसर और बांझपन जैसे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

Environmental NGO Toxics Link के इस शोध में शामिल रहे डॉ. अमित ने कहा कि 'हमें स्टडी के दौरान पता चला कि पैड्स में कार्सिनोजेन्स, रिप्रोडक्टिव टॉक्सिन्स और एलर्जेंस जैसे जहरीले कैमिकल हैं, जो कि महिलाओं के इंटरनल अंगों में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं, जिसकी वजह से महिलाओं में कैंसर और बांझपन जैसी बीमारियां बढ़ रही हैंं।' उन्होंने बताया कि 'इस स्टडी के लिए उन्होंने देश के करीब 10 ब्रांडों के पैड को चुना, जिनमें बहुत सारे काफी लोकप्रिय भी हैं, लेकिन सभी में खतरनाक कैमिकल मिले हैं, जिसके बारे अब सभी को काफी गंभीरता से सोचने की जरूरत है।'

गौरतलब है कि मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक इंडिया में करीब 64 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी पैड का प्रयोग करती हैं, जिसमें से चालीस प्रतिशत 15-24 वर्ष की फीमेल हैं। यही नहीं देश में सैनिटरी पैड की सेल 618.4 मिलियन डॉलर तक होती है।
पैड्स में थेलैट और वोलोटाइल मिले
NGO Toxics Link की सदस्य ने बताया कि 'हमें स्टडी के दौरान हर एक पैड्स में थेलैट और वोलोटाइल (वीओसी)ज्यादा मिले, जो कि सीधे कैंसर को जन्म देते हैं और ये फीमेल वजाइना पर अन्य बॉडी के अंगों की तुलना में आसानी से असर करते हैं। दरअसल पैड्स को लचीला, मुलायम और Long Lasting बनाने के लिए पैड्स में थेलैट का इस्तेमाल किया जाता है जो कि जानलेवा शामिल हो सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमारे यहां बहुत कम लोग पैड्स बनाने की सही गाइडलाइंस का प्रयोग करते हैं लेकिन इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जबकि पैड्स के शेप, बनावट, कैमिकल का इस्तेमाल और दाम को लेकर सही दिशा-निर्देश होने चाहिए और इसका सभी को सख्ती का पालन करना चाहिए।'

मालूम हो कि नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के मुताबिक थेलैट स्पर्म सिंड्रोम, कैंसर, पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन संबंधी विकारों को जन्म देता है। यही नहीं अस्थमा, अटेंशन डिसऑर्डर, ब्रेस्ट कैंसर, मोटापा, लो आईक्यू जैसे भी रोग थैलेट की वजह से होते हैं तो वहीं वीओसी लीवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है और कैंसर जैसे रोग का कारण बन सकती है। वैसे ये दोनों प्रोडक्टस पेंट, नेलपॉलिश,एयर फ्रेशनर जैसी चीजों में भी मिलते हैं लेकिन पैड्स में पाए जाने की वजह से ये सीधे वजाइनल टीश्यू को इफेक्ट करते हैं, जो कि एक गंभीर बात है।












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