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सनातन धर्म विवाद पर SC में स्टालिन की फजीहत, क्या लोकसभा चुनावों में INDIA को होगा नुकसान?

लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए डीएमके नेता और तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन को जिस तरह से फटकार लगाई है, उससे भाजपा को एक बड़ा मुद्दा हाथ लग सकता है।

सनातन धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की वजह से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे के खिलाफ 6-6 राज्यों में एफआईआर दर्ज हैं। वह इसी पर राहत की उम्मीद में सर्वोच्च अदालत पहुंचे हैं।

sc on stalin

सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी,डीएमके नेता को फटकार
लेकिन, वहां उन्हें जिस तरह की फटकार लगी है, उससे अंतिम फैसले से पहले ही एक तरह से सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में अपना रुख साफ कर दिया है।

6 राज्यों में दर्ज एफआईआर को क्लब करवाने की गुहार
सनातन धर्म के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी को लेकर स्टालिन के खिलाफ तमिलनाडु ही नहीं, महाराष्ट्र, कर्नाटक, यूपी, बिहार से लेकर जम्मू और कश्मीर तक में केस दर्ज है। वे इन्हीं एफआईआर को क्लब करने की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

आपने जो कहा था, क्या आप उसका अंजाम जानते हैं?- सुप्रीम कोर्ट
जैसे ही कांग्रेस नेता और स्टालिन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में उनकी याचिका पेश की अदालत ने उन्हें जोरदार फटकार लगाई।

जस्टिस दत्ता ने कहा, 'आप अपने अनुच्छेद 19(1)(ए) के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। आप अपने अनुच्छेद 24 के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। अब आप अपने अनुच्छेद 32 के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं? आपने जो कहा था, क्या आप उसका अंजाम जानते हैं?'

इसपर सिंघवी ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि वे स्टालिन की टिप्पणी को किसी भी तरह से सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि 'मुझे (स्टालिन) 6 उच्च न्यायालयों में जाना होगा, मैं हमेशा इसी में झूलता रहूंगा.....यह अभियोग (चलने) से पहले उत्पीड़न है...'

आप एक आम आदमी नहीं हैं-सुप्रीम कोर्ट
लेकिन, स्टालिन की टिप्पणी पर जज बहुत ही नाराज नजर आए। जस्टिस दत्ता ने सिंघवी की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि 'आप एक आम आदमी नहीं हैं। आप एक मंत्री हैं। आपको अंजाम का पता होना चाहिए।' हालांकि, सिंघवी के बहुत कहने पर अदालत 8 मार्च को इसपर सुनवाई के लिए तैयार हुई है।

सनातन धर्म को मिटाने की किया था आह्वान
पिछले साल सितंबर में एक कार्यक्रम के दौरान डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और इसके खिलाफ सिर्फ बोलने का नहीं, बल्कि इसे उसी तरह से जड़ से मिटाने का आह्वान किया था।

स्टालिन के बयान पर मच चुका है सियासी तूफान
उनके इस बयान के बाद बहुत बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और इंडिया ब्लॉक की पार्टियां, इससे कन्नी काटती नजर आईं। वहीं बीजेपी ने डीएमके समेत सभी सहयोगी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी नेताओं ने तो उनके बयान की तुलना हिटलर के विचारों से भी की थी।

चुनावों से पहले भाजपा को मिल गया है बड़ा मुद्दा
लेकिन, स्टालिन अपने आपत्तिजनक बयान को वापस लेना तो दूर, बार-बार उसका समर्थन करते नजर आए। अब जिस तरह से लोकसभा चुनावों से ठीक पहले यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी जताने की वजह जिस तरह से उभरा है, उससे भाजपा को विपक्ष के खिलाफ एक बड़ा हथियार मिल गया है।

तमिलनाडु में पहले से ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने डीएमके सरकार के खिलाफ अभियान चला रखा है। उन्होंने इसके खिलाफ करीब 8 महिने तक पदयात्रा की है।

तमिलनाडु में कांग्रेस डीएमके की सहयोगी है, इसलिए प्रदेश के बाहर भी भाजपा को कांग्रेस और सहयोगियों पर निशाना साधने का मौका मिल सकता है, जिनपर वह पहले से ही हिंदू और सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाती रही है।

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