Sanatan Controversy: 'सनातनियों के दिल, दिमाग को पहुंची बहुत पीड़ा', पूर्व न्यायधीशों ने CJI को पत्र में लिखा
सनातन के खिलाफ टिप्पणी के मामले में उच्चतम न्यायालय से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई है। इसको लेकर पूर्व न्यायधीशों और नौकरशाहों के एक समूह ने सीजेआई को पत्र लिखा है।
सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पूर्व न्यायधीशों और नौकरशाहों ने सीजेआई को पत्र लिखकर तमिलनाडु सरकार में मंत्री व डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि डीएमके नेता के टिप्पणी से सनातन धर्म के मानने वालों को बहुत पीड़ा हुई है। मामले में उच्च न्यायालय से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की गई है।
उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों और नौकरशाहों सहित 262 लोगों के समूह ने तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन की विवादास्पद टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने इसको लेकर सीजेई को लिखे पत्र में कहा है कि सनातन के खिलाफ टिप्पणी से इस धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुईं है। पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं में 14 न्यायाधीश, 130 नौकरशाह (20 राजदूत) और 118 सशस्त्र अधिकारी शामिल थे।

भारत के मुख्य न्यायधीश को लिखे पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के बयान को घृणा की भावना फैलाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह सांप्रदायिक वैमनस्य और सांप्रदायिक हिंसा को भड़का सकता है। स्टालिन के शब्दों ने भारत के आम नागरिकों, विशेषकर सनातन धर्म में विश्वास करने वालों के दिल और दिमाग में बहुत पीड़ा पहुंचाई है। पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस एन ढींगरा और पूर्व केंद्रीय शिपिंग सचिव गोपाल कृष्ण आईएएस भी शामिल हैं।
पत्र में आगे कहा गया कि ऐसे बयान भारत के संविधान के मूल पर प्रहार करते हैं। क्योंक भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। तमिलनाडु सरकार पर आरोप लगाते हुए पूर्व जजों और नौकरशाहों ने कहा कि वहां कानून का शासन कमजोर दिख रहा है, क्योंकि वहीं राज्य सरकार ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है और उनकी सनातन पर टिप्पणी को उचित बताया है, जो कि अदालत के आदेशों के अवमानना है।
पूर्व जजों और नौकरशाहों ने पत्र में शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला दिया। अदालत को बताया कि अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ और आगे कहा कि राज्य सरकार को किसी भी शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना किसी भी घृणास्पद भाषण अपराध के खिलाफ मुकदमा कार्रवाई करनी चाहिए।
दरअसल, तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि सनातन सामाजिक न्याय के विचार के खिलाफ है और इसे खत्म करना होगा। बैठक में उन्होंने कहा, "कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जा सकता, इसे उन्ह स्वयं ही खत्म कर देना चाहिए। हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं कर सकते। लेकिन इसे हमें इसे मिटाना है। ऐसे ही हमें सनातन को मिटाना है। सनातन का विरोध करने के बजाय इसे खत्म किया जाना चाहिए।"












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