Samudrayan: भारत का पहला मानव महासागर अभियान, इसकी 10 बड़ी बातें जानिए
चेन्नई, 31 अक्टूबर: भारत के पहले मानवयुक्त महासागर अभियान 'समुद्रायान' को बीते शुक्रवार को ही केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने चेन्नई में लॉन्च किया है। इस मौके पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'इस अनोखे ओशन मिशन की शुरुआत के साथ ही भारत, अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और चीन के उस अभिजात क्लब में शामिल हो गया है जिसके पास समुद्र के अंदर की गतिविधियों को अंजाम देने लायक पानी के अंदर काम करने वाला ऐसा वाहन होगा।' इसे इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें मिशन पर एक साथ तीन लोग 12 से 96 घंटे तक समुद्र के अंदर बहुत ज्यादा गहराई में रिसर्च की गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। अगर इसकी 10 प्रमुख बातों पर गौर करें तो वे हैं-

भारत का पहला मानवयुक्त महासागर अभियान
1- समुद्रयान भारत के पहले मानवयुक्त डीप ओशन मिशन है। 'सागर निधि' राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) का एक प्रमुख शोध पोत है। इस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लिखा है- ''सागर निधि' की झलक, भारत के अत्याधुनिक, आइस-क्लास अनुसंधान पोत जहाज से चेन्नई बंदरगाह से नौकायन।'
2-नया पोत सर्वेक्षण और संसाधनों की खोज और समुद्र विज्ञान के उद्देश्यों के लिए है। इसमें रडार, भूकंप संबंधी उपकरण भी शामिल होंगे और यह समुद्र तल की विशेषताओं का अध्ययन भी कर सकता है।

समुद्र के अंदर भारत की शक्ति बढ़ जाएगी
3- एक सवाल के जवाब में एक अधिकारी ने बताया है कि प्रस्तावित पोत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके भूकंपीय उपकरण चट्टानों, मिट्टी और पूरे समुद्र तल के गुणों को समझने के लिए भूकंपीय संकेत भेज सकते हैं, जिससे खनिजों, तेल, हाइड्रोथर्मल वेंट जैसी चीजों की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करेंगे।
4- हालाकि, भूकंपीय सेंसर या उपकरण आयात करने पड़ सकते हैं। जबकि रडार का इस्तेमाल चक्रवातों का पूर्वानुमान लगाने भी किया जा सकता है।

1,200 करोड़ रुपये तक की लागत का अनुमान
5- प्रस्तावित नए शिप पर 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह भविष्य में 38 साल पुराने पोत 'ओआरवी सागर कन्या' की जगह ले लेगा।
6-डॉक्टर जितेंद्र सिंह के मुताबिक इसकी आला दर्जे की तकनीक से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को मदद मिलेगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय गहरे समुद्र यानी 1000 और 5500 मीटर की गहराई में खोज में लगा हुआ है, जिसमें पॉलीमेटेलिक मैंगनीज नोड्यूल, गैस हाइड्रेट्स, हाइड्रो-थर्मल सल्फाइड और कोबाल्ट क्रस्ट जैसे गैर-जीवित संसाधनों के बारे में पता लगाया जा रहा है।

12 से 96 घंटे तक समुद्र के अंदर रह सकेंगे वैज्ञानिक
7- उन्होंने यह भी कहा कि मानवयुक्त सबमर्सिबल 'मत्स्य 6000' का प्रारंभिक डिजाइन पूरा हो चुका है। इसरो, आईआईटीएम और डीआरडीओ जैसे संगठनों से भी इस दिशा में सहायता ली जा रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 'मत्स्य 6000' टाइटेनियम के मिश्रधातु से बना है, जिसका व्यास 2.1 मीटर है, जो सामान्य स्थिति में तीन लोगों के साथ 12 घंटे तक गहरे समंदर में रह सकता है और जरूरत पड़ने पर 96 घंटे तक समुद्र की गहराइयों में मौजूद रह सकता है।
8- 2024 की दूसरी तिमाही तक गहरे पानी में चलने वाली 'मत्स्य 6000' पनडुब्बी (सबमर्सिबल) ट्रायल के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। उन्होंने कहा है, 'डीप ओशन मिशन के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने और खनन, जैव-विविधता, स्वच्छ ऊर्जा, ताजे पानी आदि की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अन्य संस्थानों को एकीकृत किया जाएगा।'

डीप ओशन मिशन के लिए 4 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट
9- ऐसा पहली बार है कि गहरे समुद्र वाला पोत, जिसमें महासागर की गहराई से भूकंप के संकेत भेजने जैसी व्यवस्था होती है, भारत में बनाई जा रही है।
10- मोदी सरकार ने डीप ओशन मिशन के लिए 5 साल तक 4,077 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान रखा है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को अमल में लाना है। जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत ने विज्ञान और प्रॉद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत विकास किया है और एक ओर जहां गगनयान से भारतीय अंतरिक्ष तक पहुंचेंगे, वहीं दूसरी ओर समंदर की गहराइओं में भी रिसर्च करेंगे। (तस्वीरें सौजन्य: जितेंद्र सिंह और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के ट्विटर से)












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