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समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देने के फैसले की SCBA ने की तरीफ, कहा-इससे हिंदुस्‍तान का कल्‍चर खराब होगा

Same Sex Marriage Verdict: महिला से महिला और पुरुष से पुरुष की शादी (समलैंगिक विवाह) को कानूनी मान्‍यता दी जाए या नहीं? इस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधिानिक बेंच ने आखिरी फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मान्‍यता देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा हम समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दे सकते हैं लेकिन उनको उनका अघिकार मिलना चाहिए।

Supreme Court

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताई है। बार एसोसिएसशन के अध्‍यक्ष डॉ अदीश सी अग्रवाल ने सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर कहा कोर्ट ने अच्‍छा जजमेंट दिया है। हमारे भारतीय समाज में सेम सेक्‍स मैरिज की परमीशन नहीं दी सकती, इससे हिंदुस्‍तान का कल्‍चर खराब होगा और माहौल खराब होगा।

उन्‍होंने कहा हमने शुरूआत में ही सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि इन मामलों में हस्‍तक्षेप ना करें क्‍योंकि ये अधिकार केवल संसद के पास है। इस बात को सुप्रीम कोर्ट आज मान चुकी है कि ये अधिकार क्षेत्र संसद का है।

डॉ अदीश सी अग्रवाल ने कहा हम इस बात से खुश है सरकार की पैरवी को सुप्रीम कोर्ट ने माना। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए ये बात कही है कानून बनाने का काम संसद का होता है, ये कोर्ट का काम नहीं है। इसके साथ ही कोई भी कानून बनाने के लिए उस पर गहन चिंतन भी आवश्‍यक होती है।

उनहोंने कहा हमारी भारतीय सभ्‍यता जो प्राचीन सभ्‍यता है जो इस समलैंगिक विवाह क नहीं मानती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी-शुदा जोड़ी रहती है वैसे ही अधिकार ऐसे कपल को भी मिलना चाहिए लेकिन सेम सेक्‍स मैरिज को हम वो मान्‍यता नहीं दे सकते क्‍योंकि भारत एक प्राचीन देश है और भारतीय समाज के अपने सिद्धांत है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्‍यक्ष अग्रवाल ने ये भी कहा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कमेटी गठित कर समलैंगिकों को सारे अधिकार देने की बात जो कही है उसका मतलब ये है कि जो भारतीय नागरिक को अधिकार मिलते हैं, इन समलैंगिकों को भी मिलने चाहिए।

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि समलैंगिक समुदाय के साथ वस्तुओं और सेवाओं को हासिल करने में किसी भी तरह का भेदभाव ना हो

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