Same Sex Marriage: SC ने समलैंगिक जोड़ों को दिया झटका, जानिये फैसले पर किसकी क्या राय...
Same sex marriage verdict: समलैंगिक एक ऐसा शब्द है, जिससे हर कोई परिचित है। तेजी से बदलते वक्त के साथ अपने अधिकारों के लिए हर कोई मुखर हो रहा है। ऐसे में बीते कुछ समय में एक ही लिंग के लोग यदि आपस में प्यार करते हैं या रिश्ता बनाना चाहते हैं तो खुलकर दुनिया के सामने आए भी हैं। हालांकि, भारत में अभी भी इसे लेकर एक हिचक बनी हुई है। इसी हिचक को दूर करने वाले फैसले की उम्मीद पर आज पूरे LGBT समुदाय की निगाहें टिकी हुई थीं। हालांकि फैसला इस उम्मीद के उलट ही आया।
समलैंगिक विवाह पर कोर्ट का फैसला
आज सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर और बड़े मुद्दे पर फैसला दिया है। एक ऐसा फैसला, जिससे समाज का एक धड़ा काफी खुश तो दूसरा काफी परेशान और नाराज भी नजर आ रहा है। हालांकि, कोर्ट के मिले-जुले फैसले के बाद कई पक्ष राहत भरी सांस लेते भी दिखे।

SC ने क्या कहा?
सबसे पहले आपको बताते हैं कि कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा? दरअसल, आज समलैंगिग विवाह मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की बेंच ने समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने से साफ इंकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए ये भी बताया कि समलैंगिक जोड़े को बच्चा गोद लेने का अधिकार है।

जोड़ों को मिलेगा समान अधिकार
कोर्ट ने अपने फैसले में साफतौर से कहा कि विवाह एक स्थायी संस्था नहीं है। ऐसे में एक कमेटी गठित की जाए, जिसमें समलैंगिक जोड़ों को परिवार के रूप में शामिल करने, संयुक्त रूप से बैंक खाते के लिए नामांकन करने, पेंशन, ग्रैच्युटी मिलने आदि के अधिकार सुनिश्चित करने के मसलों पर विचार करेगी। इसका मतलब ये हुआ कि भले कोर्ट ने समलैंगिक जोड़ों को विवाह करने के अधिकार से वंचित रखा हो, लेकिन उन्हें अन्य लोगों की तरह समान अधिकार देने का बात अपने फैसले में जरूर कही है।
फैसले पर राय
ये तो रहा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सार। अब बात करते हैं कोर्ट के फैसले पर लोगों की प्रतिक्रियाओं के बारे में। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट कुछ एलजीबीटी समुदाय के लोगों की याचिका पर विचार कर रहा था। इन्हीं में से एक याचिकाकर्ता हरीश अय्यर कहते हैं कि हालांकि, अंत में फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां हमारे पक्ष में जरूर थीं।

क्या बोले याचिकाकर्ता हरीश अय्यर?
उन्होंने कहा कि उन्होंने इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल दी है और केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनकर ने पहले ही हमारे खिलाफ बहुत बातें कही हैं। इसलिए हमारे लिए ये जरूरी है कि हम अपनी चुनी हुई सरकार, विधायकों और सांसदों के पास जाएं और उन्हें बताएं कि हम दो लोगों की तरह अलग हैं। इसमें कुछ वक्त लग सकता है लेकिन हमें सामाजिक मान्यता मिलेगी।
याचिकाकर्ता अंजलि गोपालन ने कही ये बात
याचिकाकर्ताओं में से एक कार्यकर्ता अंजलि गोपालन का कहना है 'हम लंबे समय से लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। गोद लेने के संबंध में कुछ भी नहीं किया गया। गोद लेने को लेकर संबंध में सीजेआई ने जो कहा वो बहुत अच्छा है। लेकिन बहुत निराशाजनक है। अन्य न्यायाधीश भी सहमत नहीं हुए। ये लोकतंत्र है लेकिन हम अपने ही नागरिकों को बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रहे हैं।'
क्या बोलीं वकील करुणा नंदी?
वकील करुणा नंदी कहती हैं कि आज कुछ अवसर थे जो मुझे लगता है कि विधायकों के लिए छोड़ दिए गए हैं और केंद्र सरकार ने विवाह के संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, हमें उम्मीद है कि उनकी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि नागरिक संघों को मान्यता दी जाए और विवाह के तत्वों को कम से कम नागरिक संघों के संबंध में कानून में लाया जाता है। मैं यह भी कहूंगी कि राज्यों में सत्ता में कांग्रेस और अन्य सरकारों के पास चिकित्सा निर्णय लेने के लिए साथी के अधिकारों की मान्यता को कानून में लाने के कई अवसर हैं क्योंकि वे स्वास्थ्य पर कानून बना सकते हैं, वे रोजगार पर भेदभाव रहित विचार कर सकते हैं, बहुत कुछ किया जा सकता है... समलैंगिक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और राज्य सरकारें उनकी रक्षा कर सकती हैं।
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