समलैंगिक विवाह: अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर, मार्च में होगी सुनवाई
समलैंगिक विवाह को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसको लेकर सभी पक्षों से जवाब मांगा गया है।

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट में बहुत सारी याचिकाएं डाली गई थीं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर अपने पास ट्रांसफर कर लिया। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत सभी पक्षों से जवाब मांगा है। जिसे 15 फरवरी तक दाखिल करना है। इसके बाद 13 मार्च को इस पर सुनवाई होगी।
खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को भी मामूली राहत दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई याचिकाकर्ता शारीरिक रूप से कोर्ट नहीं आ सकता, तो वो वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़ सकता है। इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से इस मुद्दे पर कानून/मिसाल आदि होने पर नोट दाखिल करने को भी कहा। पीठ ने केंद्र के वकील से ये भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोई याचिकाकर्ता छूटने ना पाए। सभी को इसमें हर हाल में शामिल किया जाए।
केंद्र ने क्या कहा था?
वहीं केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सर्वोच्च अदालत के पास इस मामले में दो विकल्प हैं। पहला दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार है। ऐसे में उसके फैसले का इंतजार किया जाए या फिर सभी मामलों की एक साथ सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो। इस पर कई याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मांग की कि सर्वोच्च अदालत सभी राज्यों के केस को एक साथ कर ले और केंद्र से इस पर जवाब मांगे।
पहले आया था ये फैसला
इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट का इस मुद्दे पर एक अहम फैसला आया था, जिसमें संविधान पीठ ने समलैंगिकता को अपराध मानने वाली IPC की धारा 377 के एक हिस्से को रद्द कर दिया था। जिसके तहत अगर दो वयस्क आपसी सहमति से निजी स्थान पर संबंध बनाते हैं, तो वो अपराध नहीं माना जाएगा।












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