‘मां-बाप को बेहोश किया, मुझे बांध दिया फिर…’ बर्खास्त IAS पूजा खेडकर के घर में खौफनाक कांड, सुन यकीन नहीं होगा
IAS Puja Khedkar: पुणे के बनर रोड पर खेडकर परिवार का बंगला 10 जनवरी की रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अचानक एक डरावनी कहानी का केंद्र बन गया। वही घर, जहां कुछ महीने पहले तक एक ट्रेनी IAS अफसर की रौबदार मौजूदगी रहती थी, अब चीख, बेहोशी और बंधे हुए हाथों की दहशत से गूंज उठा।
बर्खास्त IAS पूजा खेडकर ने पुलिस को फोन कर बताया कि उनके घर में काम करने वाले एक नौकर ने उनके माता पिता को नशीली दवा देकर बेहोश कर दिया और फिर उन्हें भी बांध दिया। इसके बाद वह घर के मोबाइल फोन लेकर फरार हो गया।

पुलिस के मुताबिक जिस नौकर पर शक है, वह महज आठ दिन पहले नेपाल से आया था और हाल ही में घर में काम पर रखा गया था। इतने कम समय में ही उसने पूरे परिवार की दिनचर्या और कमजोरियों को समझ लिया और उसी का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे दिया।
बर्खास्त IAS पूजा खेडकर बोली- 'मैंने किसी तरह खुद को छुड़ाया'
पूजा खेडकर ने पुलिस को बताया कि जब उनके माता पिता दिलीप खेडकर और मनोरमा खेडकर बेहोश हो गए, तब आरोपी ने उन्हें भी रस्सियों से बांध दिया। घर में मौजूद सभी लोगों के मोबाइल फोन उसने अपने कब्जे में ले लिए ताकि कोई बाहर मदद न मांग सके।
पूजा का दावा है कि वह किसी तरह दरवाजे की कुंडी का सहारा लेकर खुद को खोलने में सफल रहीं। इसके बाद उन्होंने घर में मौजूद एक दूसरे फोन से चतुश्रृंगी पुलिस स्टेशन को कॉल किया। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और देखा कि दिलीप और मनोरमा खेडकर बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं। दोनों को तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस के सामने अभी कई सवाल
हालांकि इस पूरे मामले में अभी एक बड़ा पेंच भी है। पूजा खेडकर ने फिलहाल लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह मानसिक रूप से ठीक महसूस करने के बाद ही औपचारिक बयान देंगी।
यह भी साफ नहीं किया गया है कि मोबाइल फोन के अलावा घर से और कोई कीमती सामान चोरी हुआ है या नहीं। पुलिस फिलहाल संदिग्ध नौकर की तलाश में जुटी है और पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की जांच कर रही है।

कौन हैं पूजा खेडकर, जिनका नाम पहले ही विवादों में था (Who is Pooja Khedkar)
यह वही पूजा खेडकर हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने हाल ही में IAS सेवा से बर्खास्त किया है। वह 2023 बैच की अधिकारी थीं और उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 841 हासिल की थी। लेकिन उनके चयन को लेकर जो परतें खुलीं, उन्होंने पूरे सिस्टम को हिला दिया।
उन पर आरोप लगा कि उन्होंने दिव्यांग और OBC कोटे का गलत इस्तेमाल किया, फर्जी दस्तावेज लगाए और अपनी पहचान तक बदल डाली। जांच के बाद उनकी सेवाएं खत्म कर दी गईं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
पूजा खेडकर को 21 मई को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी। जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा था कि वह कोई ड्रग माफिया या आतंकवादी नहीं हैं और उन पर हत्या जैसा कोई आरोप नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर 2024 के उस आदेश को भी पलट दिया था, जिसमें पूजा को लेकर सख्त टिप्पणियां की गई थीं।

पुणे से शुरू हुई थी फर्जीवाड़े की कहानी
पूजा पुणे में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर ट्रेनिंग कर रही थीं, तभी उन पर विशेष सुविधाएं मांगने और एक वरिष्ठ अधिकारी के चैंबर पर कब्जा करने के आरोप लगे। उनकी निजी ऑडी कार पर लाल बत्ती और महाराष्ट्र सरकार की प्लेट लगी हुई थी। जिला कलेक्टर सुहास दिवासे की शिकायत के बाद उनका तबादला वाशिम कर दिया गया।
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि उनके दिव्यांगता सर्टिफिकेट पर दिया गया पता पुणे के तलावडे इलाके की एक फैक्ट्री का था, न कि कोई घर। वही फैक्ट्री उस ऑडी कार के नाम पर भी रजिस्टर्ड थी। नियमों के मुताबिक दिव्यांगता सर्टिफिकेट के लिए आधार कार्ड जरूरी होता है, लेकिन पूजा ने राशन कार्ड लगाया था।
मेडिकल रिपोर्ट से लेकर OBC तक सब पर सवाल
पूजा ने 2018 और 2021 में अहमदनगर के सिविल अस्पताल से दो अलग अलग दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाए थे। बाद में उन्होंने दिल्ली में मेडिकल जांच से कई बार बचने की कोशिश की और आखिर में एक निजी अस्पताल की रिपोर्ट UPSC को सौंप दी। यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल ने साफ कहा कि उनकी जांच में पूजा को सिर्फ 7 प्रतिशत लोकोमोटर डिसेबिलिटी थी।
इसके अलावा पूजा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने माता पिता की वैवाहिक स्थिति छिपाकर OBC नॉन क्रीमी लेयर का फायदा लिया। उनके पिता दिलीप खेडकर रिटायर्ड अधिकारी हैं और चुनावी हलफनामे में उन्होंने 40 करोड़ की संपत्ति बताई थी, जबकि पूजा ने UPSC को परिवार की संपत्ति आठ लाख से कम दिखाई।
अब एक नई डरावनी परत
अब जब यह सारा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था, तभी पुणे के उस बंगले में हुई यह कथित वारदात सामने आ गई। एक बर्खास्त IAS अधिकारी, बेहोश माता पिता, बंधी हुई बेटी और फरार नौकर। यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती। पुलिस के लिए यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि कई अनसुलझे सवालों की एक और फाइल बन गई है।
खेडकर परिवार की उस रात की असली सच्चाई क्या है, यह आने वाली जांच में सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि पूजा खेडकर का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह और भी ज्यादा चौंकाने वाली है।
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