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Rupee Record Low: डॉलर की बढ़ती मांग के बीच फिर औंधे मुंह गिरा रुपया, रिकॉर्ड स्तर पर नई गिरावट

Rupee Record Low: भारतीय रुपया गुरुवार, 11 दिसंबर को एक बार फिर ऐतिहासिक गिरावट के साथ ₹90.42 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद शुरुआती सकारात्मक संकेत देखने को मिले थे।

हालांकि, उसके बाद कंपनियों और बैंकों की लगातार बढ़ती डॉलर मांग ने रुपये पर भारी दबाव बना दिया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 1.45 बजे के आसपास रुपया ₹90.42 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा था।

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डॉलर की भारी मांग ने फेड के असर को किया बेअसर

फेडरल रिज़र्व ने 10 दिसंबर को अपेक्षित दरों में कटौती की और संकेत दिया कि लंबे समय तक रेट स्थिर रह सकते हैं। इससे डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ और एशियाई मुद्राओं में हलचल दिखी। डॉलर इंडेक्स भी दो महीने के निचले स्तर से थोड़ा उभरा। लेकिन ये वैश्विक संकेत रुपये को संभालने में नाकाम रहे।

ट्रेडर्स के मुताबिक विदेशी और घरेलू निजी बैंकों द्वारा भारी डॉलर खरीद-जो मुख्य रूप से कॉरपोरेट पेमेंट्स से जुड़ी थी-रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह बनी। एक बैंक अधिकारी ने बताया,"डॉलर आउटफ्लो लगातार बढ़ रहा है और ये ग्लोबल सपोर्टिव संकेतों को मात दे रहा है।"

2022 के बाद सबसे खराब साल की ओर बढ़ता रुपया

रुपया इस समय 2022 के बाद अपने सबसे खराब सालाना प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में उतार-चढ़ाव, अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर व्यापारिक शुल्क बढ़ाना, और ग्लोबल अनिश्चितताएं रुपये पर लगातार दबाव बना रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर जल्द ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौता नहीं होता, तो आने वाले महीनों में रुपये की और गिरावट संभव है।

अगले हफ्ते RBI की बड़ी कार्रवाई: 5 बिलियन डॉलर स्वैप

अब बाजार की नजरें रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की आने वाली 5 बिलियन डॉलर की डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप पर हैं। यह स्वैप अगले हफ्ते होगी और बैंकिंग सिस्टम में तरलता (liquidity) बढ़ाने के लिए की जा रही है। हाल ही में आरबीआई की इंटरवेंशन और बड़े IPO इनफ्लो से बाजार में डॉलर की अधिकता और तरलता असंतुलन देखने को मिला है। बैंकरों का मानना है कि इस स्वैप में मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी और यह रुपये में अल्पकालिक स्थिरता लाने में मदद कर सकती है।

सीतारमण का बयान: "रुपया अपना स्तर खुद तय करेगा"

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Hindustan Times Leadership Summit 2025 में बोलते हुए कहा कि रुपये की गिरावट को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, रुपया अपना उचित स्तर खुद ढूंढ लेगा। मुद्रा उतार-चढ़ाव को भारत की आर्थिक बुनियादों के संदर्भ में देखना चाहिए। सीतारमण ने यह भी याद दिलाया कि जब उनकी पार्टी विपक्ष में थी, तब बढ़ती महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था ने रुपये की गिरावट को ज्यादा चिंताजनक बना दिया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक स्थिति मजबूत है और बहस को वास्तविक परिदृश्यों के दायरे में ही रखना चाहिए।

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