मोदी सरकार की शिक्षा नीति में आरएसएस ने की अंग्रेजी को खत्म करने की सिफारिश

शिक्षा के सभी स्तरों पर भारतीय भाषाओं में पढ़ाने के सुझाव। विदेशी भाषाओं को हटाने की सिफारिश।

दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एजुकेशन विंग ने नरेंद्र मोदी सरकार से नई शिक्षा नीति में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग की है। विंग ने कहा है कि स्कूल लेवल पर भाषाओं के विकल्प चयन में से विदेशी भाषाओं को निकाल देना चाहिए।

prakash javdekar

ये हैं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सुझाव

- निजी और सरकारी संस्थानों में सभी लेवल पर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देकर धीरे-धीरे अंग्रेजी भाषा में टीचिंग को खत्म किया जाए। कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में मातृभाषा में स्टूडेंट्स को पढ़ाया जाए।

- स्कूल लेवल पर विदेशी भाषाओं के चयन के विकल्प को हटाया जाए।

- शिक्षा के किसी भी लेवल पर अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म की जाए।

- आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसे संस्थानों में, जहां अंग्रेजी में पढ़ाया जाता है, वहां भी भारतीय भाषाओं में टीचिंग की व्यवस्था की जाए।

- उन स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए जो स्टूडेंट्स को मातृभाषा बोलने से रोकते हैं।

-राष्ट्रीय मुद्दों और जरूरतों के अनुसार सभी रिसर्च वर्क किए जाएं। इसी मापदंड पर यूजीसी के स्कॉलरशिप दिए जाएं।

- भारतीय संस्कृति, परंपरा, पंथ, विचार और देश के महान व्यक्तित्वों के खिलाफ की गई बातों को हर लेवल के टेक्स्ट बुक्स से निकाले जाएं।

मानव संसाधन मंत्रालय बना रही नई शिक्षा नीति

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई शिक्षा नीति बनाने जा रही है। इसके लिए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के नेताओं ने मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात की और उनको सुझावों की सूची सौंपी।

मानव संसाधन मंत्रालय ने न्यास को ईमेल कर कहा है कि उनके सुझावों को नोट कर लिया गया है और नई शिक्षा नीति बनाते समय उन पर विचार किया जाएगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+