ऑनलाइन अभियान के जरिए RSS लोगों को बताएगा स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ हमेशा से ही विपक्ष के निशाने पर रहता है, लगातार विपक्ष आजादी की लड़ाई में आरएसएस की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे में विपक्ष के तमाम आरोपों पर पलटवार के लिए आरएसएस ने ऑनलाइन अभियान चलाने का फैसला लिया है, जिसमे बताया जाएगा कि आजादी की लड़ाई में आरएसएस की क्या भूमिका थी। आरएसएस के भीतर तमाम ऐसे नेताओं को लगता है कि आजादी के लड़ाई में आरएसएस की भूमिका को नहीं बताकर वह बड़ी गलती कर रहे हैं।

14 दिन चलेगा अभियान

14 दिन चलेगा अभियान

ऐसे में आरएसएस ने फैसला लिया है कि वह 15 अध्याय के माध्यम से संघ द्वारा आजादी की लड़ाई में निभाई गई भूमिका के बारे में लोगों को अवगत कराएगा। अभियान में बताया जाएगा कि कैसे सरसंघचालक केशव बालीराम हेडगेवार ने आजादी में अपनी भूमिका निभाई थी। इन तमाम अध्याय को सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर स्वयंसेवक और संघ के समर्थक साझा करेंगे। यह अभियान 1 अगस्त से लेकर 14 अगस्त तक चलेगा।

लोगों की गलत धारणा दूर होगी

लोगों की गलत धारणा दूर होगी

संघ से दशकों से जुड़े और 18 किताबों के लेखक नरेंद्र सहगल ने बताया कि हम आरएसएस की आजादी के दौरान भूमिका के लिए लेख को भेज रहे हैं, जिसे बड़े स्तर पर तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा। जिसके बाद आरएसएस के बारे में जो लोगों की गलत धारणा है वह दूर होगी। सहगल ने कहा कि हेडगेवार ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था, वह जेल भी गए थे, गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। लेखक श्रीधर दामले ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अपनी भूमिका को लोगों के बीच नहीं लाकर संघ इतिहास के साथ अन्याय कर रहा है, ऐसे में जरूरत थी कि इतिहास को आरएसएस और सरकारी दस्तावेज व अखबारों के माध्यम से देखा जाए।

इतिहासकारो ने दावे का खंडन किया

इतिहासकारो ने दावे का खंडन किया

श्रीधर ने कहा कि बतौर शोधकर्ता मुझे ऐसा महसूस होता है कि आरएसएस को सामाजिक, सांस्कृतित विकास की दिशा में दस्तावेजों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों को उजागर करना चाहिए। इससे कार्यकर्ता प्रेरित होंगे। वहीं इतिहासकारों ने संघ के दावे का खंडन किया है। जेएनयू में इतिहास की प्रोफेसर सुचेता महाजन ने जनवरी 2018 में एक लेक्चर के दौरान कहा था कि इतिहास को फिर से सांप्रदायिक चश्मे से लिखना सच को गलत साबित करने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस ने ना सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया बल्कि अंग्रेजों का भरोसेमंद भी था। असहयोग आंदोल, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था।

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