छत्तीसगढ़ सरकार की गोबर खरीदने की योजना का भाजपा ने उड़ाया मजाक, RSS ने की तारीफ

रायपुर। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने हाल ही में किसानों से गोबर खरीदने का फैसला लिया है, जिसपर सियासत जोरों पर है। सरकार के इस फैसले का जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विरोध किया है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस फैसले को सही बताया है। छत्तीसगढ़ सरकार गोधन न्याय योजना के तहत 1.50 रुपये प्रति किलो से हिसाब से गोबर खरीदेगी। इस योजना को 21 जुलाई को लॉन्च किया जाएगा।

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मंगलवार को आरएसएस समर्थकों के एक समूह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की और उन्हें एक प्रशंसा पत्र सौंपा। आरएसएस कार्यकर्ता सुबोध राठी ने कहा, 'नवंबर 2019 में हमने राज्य में एक अभियान चलाया था, जिसमें गांव के लोगों और गाय की देखभाल करने वालों की सहायता के लिए जिला प्रशासन से गौमूत्र और गोबर खरीदने को कहा गया था। सरकार ने हमारी कुछ मांगों को मान लिया है, तो हम आभार व्यक्त करना चाहते हैं और कुछ सुझाव देना चाहते हैं।'

राठी ने आगे कहा, 'हमने मांग की थी कि गाय का गोबर 5 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदा जाए। हम ये भी चाहते हैं कि सरकार गोमूत्र भी खरीदे क्योंकि इसका इस्तेमाल बायो-पेस्टिसाइड में किया जा सकता है।' पत्र पर संघ के क्षेत्रीय संयोजक बिसराम यादव के हस्ताक्षर हैं। जिसमें मुख्यमंत्री बघेल को इन मांगों को मानने के लिए धन्यवाद कहा गया है। मांगों की लिस्ट में बायोफर्टिलाइजर की मदद से उगाई जाने वाली फसलों के लिए एक विशेष बाजार स्थापित करने की बात भी कही गई है।

इस मामले में राज्य के आरएसएस नेता प्रभात मिश्रा कहते हैं, 'यह दावा करना गलत होगा कि पत्र आरएसएस का है। यह आरएसएस का एक विंग है जिसने इसमें भाग लिया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के कार्यक्रम हमेशा हमारी विचारधारा का हिस्सा रहे हैं।' भाजपा ने हालांकि राज्य सरकार की इस योजना पर सहमति नहीं जताई है। पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने इसे लेकर ट्वीट भी किया। जिसमें उन्होंने कहा, 'छत्तीसगढ़ के वर्तमान राजकीय चिन्ह को नरवा, गरवा, घुरवा, बारी की अपार सफलता और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में "गोबर" के महत्व को देखते हुए इसे राजकीय प्रतीक चिन्ह बना देना चाहिए।'

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