‘हिंदू एकजुट हों तो बंगाल बदल सकता है, RSS को BJP से जोड़कर देखना बड़ी भूल’, चुनाव से पहले बोले मोहन भागवत
Mohan Bhagwat West Bengal Election 2025: चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बयान ने हलचल मचा दी है। कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर हिंदू समाज एकजुट हो जाए तो बंगाल की स्थिति में सुधार संभव है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि राजनीतिक बदलाव पर टिप्पणी करना उनका काम नहीं है और संघ सामाजिक परिवर्तन के लिए काम करता है, न कि सत्ता की राजनीति के लिए।
मोहन भागवत ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखे जाने के मामले पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि इस तरह के कदम सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए उठाए जा रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा यह न तो हिंदुओं के हित में है और न ही मुसलमानों के। उन्होंने कहा कि पुराने विवादों को फिर से जिंदा करने की कोशिश समाज के लिए नुकसानदेह है और ऐसा नहीं होना चाहिए।

🟡 सरकारी पैसे से धार्मिक स्थल बनाने पर क्या बोले मोहन भागवत?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा ने सरकारी धन से मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण के सवाल पर स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी धर्मस्थल के निर्माण में पैसा नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर सरकार के पैसों से नहीं बना था और राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने ट्रस्ट के जरिए जनसहयोग से बना है। सरकार ने केवल कानूनी प्रक्रिया निभाई, धन नहीं दिया।
🟡 बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर भड़के मोहन भागवत
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और हालात बेहद कठिन हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सबसे जरूरी है कि वहां के हिंदू एकजुट रहें। साथ ही दुनिया भर के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए, जितना संभव हो उतना सहयोग देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुओं के लिए भारत ही एकमात्र देश है और भारतीय सरकार को इस मुद्दे पर संज्ञान लेना चाहिए। कुछ कदम उठाए जा रहे होंगे, लेकिन हर बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
🟡 'RSS को BJP से जोड़कर देखना बड़ी भूल'
RSS पर लगने वाले आरोपों पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ को अकसर मुस्लिम विरोधी बताने की धारणा बनाई जाती है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि संघ का काम पूरी तरह पारदर्शी है और कोई भी आकर देख सकता है। कई लोगों ने संघ को नजदीक से देखने के बाद माना है कि RSS हिंदुओं को संगठित करता है और उनके संरक्षण की बात करता है, लेकिन वह मुस्लिम विरोधी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि RSS को BJP के चश्मे से देखकर समझना बड़ी गलती है। संघ कोई साधारण सेवा संगठन नहीं है और उसकी विचारधारा को तुलना के जरिए समझने से गलतफहमियां पैदा होती हैं।
मोहन भागवत का ये कहना कि 'RSS को BJP से जोड़कर देखना बड़ी भूल' है, चर्चाओं में है। लोगों का मानना है कि ऐसा हो सकता है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संघ के बीच कुछ ठीक ना हो। लेकिन आपको बता दें कि मोहन भागवत ने साफ-साख कहा है कि संघ किसी पार्टी के लिए काम नहीं करती है।
🟡 'गलत धारणाओं के खिलाफ सच जानना जरूरी'
अपने बयान के आखिर में मोहन भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ झूठे नैरेटिव फैलाए जाते हैं क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि संघ के बढ़ने से उनके स्वार्थ प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि लोग संघ के नाम से परिचित हैं, उसके काम से नहीं। इसलिए राय बनानी है तो तथ्यों के आधार पर बनाएं, अफवाहों या कल्पनाओं पर नहीं।
मोहन भागवत के ये बयान ऐसे वक्त आए हैं, जब बंगाल में चुनावी माहौल गरम है। उनके शब्दों को सिर्फ सामाजिक संदेश माना जाए या सियासी संकेत, इस पर बहस तेज हो गई है, लेकिन इतना तय है कि संघ प्रमुख के बयान ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।












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