मूल्यों, परंपराओं और दर्शन की सकारात्मकता समाज को प्रदान करें शिक्षक: सुरेश सोनी
नई दिल्ली। नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) की ओर से मकर सक्रांति व लोहड़ी के वार्षिक मिलनोत्सव के अवसर पर श्री गुरु तेग़ बहादुर खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में "वर्तमान परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका" विषय पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह-सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों,परंपरा और दर्शन के सकारात्मक पक्ष को समाज के बीच ले जाना चाहिए।

भारतीय संस्कृति में शिक्षकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षकों ने हमेशा समाज को नई दिशा देने का काम किया है।उन्होंने कहा कि कई विद्वान विदेशी नजरिए से भारत को मूल्यांकन करते है जो कि ठीक नहीं है।भारत का मूल्यांकन भारतीय दृष्टि से किया जाना चाहिए।उन्होंने इस अवसर पर कहा कि आज इतिहास को भारतीय दृष्टि से परखने की जरूरत है।
सोनी जी ने मकर सक्रांति को प्रकाश से जोड़ते हुए बताया कि सभी कुछ काल में घटित होता है मकर सक्रांति में अन्धकार कम होता है और प्रकाश बढ़ता है।आगे उन्होंने कहा कि यह द्वंद्व का समय है।यह द्वंद्व भारत और विश्व दोनों के स्तर पर है।आज विभिन्न अवधारणाओं,मूल्यों और व्यवस्थाओं का संघर्ष विश्व में चल रहा है।भारत की एकता ,सांस्कृतिक जड़ें और राष्ट्रवाद मजबूत होने लगा है।इस मजबूती को उत्तर-भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर जगह महसूस किया जा रहा है।सांस्कृतिक राष्ट्रवाद देश की धारा का संवाहक है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य इंद्रमोहन कपाही ने मकर संक्रांति को वैज्ञानिक आधार से जोड़ते हुए इस पर्व को प्रकाश का प्रतीक बताया।एन डी टी एफ के अध्यक्ष डॉ.अजय भागी ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया को तीव्र करने,पेंशन और प्रमोशन की समस्याओं को जल्द सुलझाने का आवाहन किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.वी एस नेगी ने किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भागीदारी की।












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