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संघ परिवार के संगठनों से जुड़े लोगों के आईएसआई ‘कनेक्शन' पर खामोशी क्यों?

मध्य प्रदेश में पिछले दिनों एंटी टेरेरिस्ट स्कवाड द्वारा बड़ी संख्या में गिरफ्तरियां हुयीं जिसमें से ज्यादातर आरोपी संघ परिवार से जुड़े संगठनों से संबंध रखते हैं।

नई दिल्ली। सिर्फ इतना सोचकर ही दिल दहल उठता है कि यदि आज देश के किसी मुसलमान अथवा गैरभाजपाई नेता के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से रिश्ते उजागर हुए होते तो क्या होता? कसम से उस गैरभाजपाई दल के नेता और मुस्लिम परिवार का जीना मुहाल हो जाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े लोग व संगठन पूरे देश में आंदोलनों की झड़ी लगा देते। रोज-रोज के धरना-प्रदर्शनों से परेशान होकर संबंधित शासन-प्रशासन को हिंसक रूख अख्तियार करना पड़ता।और अगर ये कहें कि साम्प्रदायिक दंगे तक हो जाते तो कोई बड़ी बात न होती। पर अफसोस कि इस बार खुद संघ परिवार ही कठघरे में है। संघ परिवार से जुड़े संगठन भाजपा, बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नेताओं के नाम आईएसआई से रिश्ते को लेकर उजागर हुए हैं। इस हालात में मीडिया और सरकार की रहस्यमयी चुप्पी पर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हैं?

सरकार से जुड़े लोग अाधिकारिक तौर पर अफसोस क्यों नहीं जता रहे हैं? इससे सिद्ध होता है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को पारदर्शी शासन प्रणाली में भरोसा नहीं है और ना ही वह देश के नागरिकों के प्रति सामान भाव रख रही है। यह सही है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस सक्रिय हो गई है, लेकिन उसके तेवर में गर्मी नहीं दिख रही है। आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले लोगों से भाजपा नेताओं के साथ जुड़ने के विवाद के साथ ही एक और नया मामला भाजपा के चरित्र को उजागर कर रहा है।

सेक्स रैकेट चलाने वाले एक आरोपी का नाम भाजपा के एक मंत्री से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस ने मसले पर आपत्ति करते हुए कहा है कि भाजपा को साफ करना चाहिए कि आखिर उनकी पार्टी का यह कौन सा चेहरा सामने आ रहा है।

संघ परिवार के संगठनों से जुड़े लोगों के आईएसआई ‘कनेक्शन' पर खामोशी क्यों?

ज्ञात हो कि आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले 12 लोगों को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। 12वीं गिरफ्तारी आयशा की हुई है जो युवाओं को अपने मोहजाल में फंसाकर उन्हें जासूसी की ट्रेनिंग देती थी। इन आरोपियों में पकड़े गए ध्रुव सक्सेना के भाजपा नेताओं से रिश्ते सामने आए हैं। कई नेताओं के साथ फोटो और उनके लिए विज्ञापन ध्रुव ने दिए हैं। दिलचस्प यह है कि इसमें नाम आने के बाद भाजपा ने ध्रुव सक्सेना से किनारा कर लिया है।

वहीं, भोपाल में उजागर हुए 'हाईप्रोफाइल अंतरराज्यीय सेक्स रैकेट' के बाद अनैतिक देह व्यापर निवारण अधिनियम के तहत 5 महिलाओं सहित 14 पुरुषों पर मुकदमें दर्ज हुये।तथा उन्हें गिरफ्तार किया गया। इनमें से एक आरोपी विक्की ठाकुर के रिश्ते भाजपा नेताओं के साथ हैं। कांग्रेस का कहना है कि विक्की ठाकुर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री विश्वास सारंग का नजदीकी है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने इन सब घटनाओं के उजागर होने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान से सवाल किया है कि आखिरकार उनकी सरकार व पार्टी में ये क्या हो रहा है? प्रदेश अध्यक्ष के पुत्र का नाम कटनी हवाला मामले में आया है। दो मंत्री नोटबंदी के बाद अपने नियंत्रण वाली बैंकों में कालाधन जमा करने के लिए चर्चाओं में आते हैं। राज्यमंत्री संजय पाठक पर अभी 2200 करोड़ रुपए के हवाला का आरोप लगा ही है। उनके परिवार और कंपनियों की जांच शुरू हो गई है।

अब पार्टी नेताओं का नाम ऐसे लोगों से जुड़ रहा है जो देह व्यापार और देश की अस्मत से खेल रहे हैं।जो दुश्मन देश के लिए जासूसी कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों का दावा है कि जासूसी कांड में पकड़े गए आरोपियों के अभी और रिश्तों को जांचा जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर उनके संबंध कहां-कहां और हो सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के लोगों का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों के भाजपा नेताओं से सिर्फ भोपाल ही नहीं दूसरे शहरों में भी रिश्ते रहे हैं। वहीं, देह व्यापार के तार भी पूरे प्रदेश में जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके बारे में भी ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई जा रही है।


इसके अलावा मध्य प्रदेश में आईएसआई के लिए जासूसी करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जासूसी कांड में एटीएस की गिरफ्त में आए सतना के बलराम सिंह का विश्व हिन्दू परिषद से कनेक्शन है। बलराम ने फरवरी, 2015 में विराट हिन्दू सम्मेलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। यह सम्मेलन विश्व हिन्दू परिषद स्वर्ण जयंती महोत्सव समिति की ओर से सतना में आयोजित किया गया था। विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया समेत कई स्थानीय लोगों के साथ उसकी तस्वीर सामने आई है। विहिप पर सवाल उठना लाजमी है क्योंकि इसी मामले में भोपाल से गिरफ्तार भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला संयोजक ध्रुव सक्सेना के भी भाजपा के बड़े नेताओं से संबंध उजागर हुए हैं। ध्रुव की पैठ प्रदेश भाजपा की पहली पंक्ति के नेताओं तक थी और वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई बड़े नेताओं के साथ भी मंच साझा कर चुका था। आईएसआई जासूसी कांड के बाद वायरल हुई ध्रुव की तस्वीरों ने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है।

हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने दो टूक शब्दों में कहा है। कि किसी के साथ फोटो खिंचवा लेने से कोई आतंकवादी नहीं हो जाता और ध्रुव सक्सेना के साथ भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। विपक्ष भाजपा के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। यह अच्छी बात है और सही भी है कि केवल फोटो खिंचा लेने से कोई आतंकी या अपराधी नहीं हो जाता। पर यही सवाल भाजपा और संघ परिवार के अन्य संगठनों से भी है कि क्या यदि आईएसआई से गैरभाजपा दलों तथा किसी भारतीय मुसलमान के रिश्ते उजागर हुए होते तो वह चुप बैठी रहती। इसे विपक्ष की नेकनीयती कही जाएगी कि वह हालात पर नजर रखे हुए है और संवैधानिक तरीके से कार्रवाई का इंतजार कर रही है। वरना दूसरा कोई होता तो ईंट से ईंट बजा देता।

संघ परिवार के संगठनों से जुड़े लोगों के आईएसआई ‘कनेक्शन' पर खामोशी क्यों?


गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की एटीएस द्वारा जम्मू के आरएसपुरा से पकड़े गये आतंकवादी ने खुलासा किया था कि भारत की आंतरिक सुरक्षा की जानकारी मध्य प्रदेश से आ रही है। इस संदर्भ में एटीएस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनसे लैपटॉप, 50 मोबाइल फोन, 3000 सिम कार्ड, 50 सिम बॉक्स मिले। इन देशद्रोहियों ने आर्मी अफसरों की तहकीकात, आर्मी मूवमेंट की ट्रेकिंग, आर्मी कैंप के फोटोग्राफ आईएसआई को दिये है। इन्हें पकड़ने के बाद पता चला कि ये सिस्टम देशव्यापी हो गया है और ख़ुफ़िया जानकारी देने के लिए 4 बड़े शहरों में कम से कम 30 टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित हो गये हैं। आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे को कांग्रेस सदन के अन्दर और बाहर ढाई साल से उठा रही है, लेकिन केन्द्र सरकार उसे गंभीरता से नहीं ले रही है।

आईएसआई से रिश्तों को लेकर जिन 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से तीन लोग सीधे भाजपा से जुड़े हुए हैं। पहला पकड़ा हुआ व्यक्ति ध्रुव सक्सेना है जो भाजपा युवा मोर्चा का सदस्य रह चुका है और आईटी सेल का संयोजक है। दूसरा जितेन्द्र सिंह है जो भाजपा के पार्षद का नजदीकी रिश्तेदार है। तीसरा बलराम सिंह है जो बजरंग दल का सदस्य है और जासूसी गिरोह का मास्टर माइंड है। पूरे गिरोह को पैसा इसके द्वारा दिया जाता था जम्मू कश्मीर में आतंकियों को पैसा भी इसी के द्वारा दिया जाता था। चौथा आशीष सिंह राठौर है जो विश्व हिन्दू परिषद का कार्यकर्ता है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। बहरहाल, देखना है कि सरकार क्या करती है।

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