आरएसएस के संगठन ने पीएम को पत्र लिखकर चीन से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिए जाने की मांग की
नई दिल्ली। यूएनएससी में चीन द्वारा आतंकी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने की राह में रोड़ा अटकाने के बाद अब देश के भीतर लगातार चीन के खिलाफ आवाज उठ रही है। आरएसएस के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वह चीन से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले ले, क्योकि उसने यूएनएससी में आतंकी मसूद अजहर का साथ दिया है। स्वदेशी जागरण मंच की ओर से पीएम मोदी को जो पत्र लिखा गया है उसमे कहा गया है कि पीएम को चीन से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लेना चाहिए और चीनी उत्पादों पर पाबंदी लगानी चाहिए। साथ ही सभी चीनी आयात पर भारी कर लगाना चाहिए।

चीन पर दबाव जरूरी
स्वदेशी जागरण मंच की ओर से कहा गया है कि सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ पहले ही यह कदम उठाया है, ऐसे में हमे चीन के खिलाफ भी इस कदम को उठाना चाहिए। अब समय है कि हमे अपने तमाम विकल्पों चीन के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहिए। हमे कूटनीतिक, आर्थिक विकल्पों के जरिए चीन को इस बात का एहसास दिलाना चाहिए कि उसने आतंकी का समर्थन किया और उसके क्या परिणाम हो सकते हैं। स्वदेश जागरण मंच के अखिल भारतीय प्रचारक अश्विनी महाजन ने कहा कि समय है कि चीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनके आयात पर कर को बढ़ाया जाए।
चीन के खिलाफ कदम उठाए सरकार
महाजन ने पत्र में लिखा है कि सरकार को तत्काल प्रभाव से चीन के खिलाफ कदम उठाने चाहिए। चीन में पहले से ही आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है, हमे चीन और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार युद्ध को इसके लिए शुक्रिया कहना चाहिए। ऐसे में हमारे कदम से चीन को जरूर दबाव महसूस होगा। उसे यह समझ आएगा कि आतंकी का साथ देने का क्या परिणाम होता है। भारत के इस कदम से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़ने के भारत के संकल्प को मजबूती मिलेगी।
चीनी उत्पाद का हो बहिष्कार
महाजन ने कहा कि भारत चीन से 76 बिलियन डॉलर का आयात करता है, ऐसे में भारत के कदम से चीन पर बड़ा दबाव पड़ेगा। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि पहले भी इस तरह के कदम सरकार ने उठाए हैं, सरकार ने एंटी डंपिंग ड्यूटी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी के किराए में बढ़ोतरी की थी। ऐसे में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिए जाने से चीन पर बड़ा असर पड़ेगा। इस बीच आरएसएस ने इस बात की भी अपील की है कि चीन के उत्पादों का भी हमे बहिष्कार करना चाहिए और इसपर कर को बढ़ाना चाहिए।












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