मद्रास HC में RSS की बड़ी जीत, तमिलनाडु की स्टालिन सरकार को मिला यह आदेश

चेन्नई, 22 सितंबर: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को मद्रास हाई कोर्ट में बहुत बड़ी जीत मिली है। अदालत ने तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार को आदेश दिया है कि वह आरएसएस को राज्य के 50 स्थानों पर 2 अक्टूबर को पथ संचलन (रूट मार्च) की अनुमति दे। गौरतलब है कि संघ पिछले कई वर्षों से इसकी कोशिश करता रहा है, लेकिन हर बार राज्य सरकार उसके आवेदन को किसी ना किसी बहाने से टालती रही है। लेकिन, अब अदालत ने डीएमके सरकार से कह दिया है कि वह हर हाल में 28 सितंबर तक आरएसएस के आवेदन को अनुमति दे दे। मामले पर विस्तृत आदेश बाद में जारी होगा।

तमिलनाडु में 50 स्थानों पर पथ संचलन की अनुमति

तमिलनाडु में 50 स्थानों पर पथ संचलन की अनुमति

2 अक्टूबर को तमिलनाडु के 50 स्थानों पर पथ संचलन के संबंध में मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जीके इलानथिरैयान ने राज्य की डीएमके सरकार से 28 सितंबर या उससे पहले निश्चित तौर पर अनुमति मंजूर करने को कहा है और अदालत इसपर विस्तृत आदेश बाद में जारी करेगी। मद्रास हाई कोर्ट की ओर से यह निर्देश आरएसएस की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया है। संघ की ओर से 2 अक्टूबर को प्रदेश भर में म्यूजिकल बैंड के साथ पूर्ण गणवेश (यूनिफॉर्म) में जुलूस (पथ संचलन) निकालने और सार्वजनिक सभाओं का आयोजन करने की मांग की गई है।

'हमें कानूनी तौर पर सभा करने का अधिकार है'

'हमें कानूनी तौर पर सभा करने का अधिकार है'

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के गृह सचिव और डीजीपी से गुरुवार तक अपनी ओर से हलफनामा दायर करने को कहा था। आरएसएस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील जी राजगोपाल ने कहा कि 'हर साल ये लोग (आरएसएस) आवेदन देते हैं, लेकिन वे (राज्य सरकार) कुछ कारण बताते हैं और इसे खारिज कर देते हैं।' 'इसलिए हमने कोर्ट से कहा कि हमें कानूनी तौर पर सभा करने का अधिकार है। हम बिना हथियारों के एकत्र होंगे; और हमपर उचित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।'

आवश्यक शर्तों के साथ मार्च निकालने की अनुमति मिलेगी

आवश्यक शर्तों के साथ मार्च निकालने की अनुमति मिलेगी

इससे पहले राज्य सरकार के अधिकारियों ने हाई कोर्ट को बताया था कि आरएसएस की मांग पर विचार करने में इसलिए वक्त लग रहा है, क्योंकि वह किन जगहों पर मार्च करने वाले हैं, इसकी डिटेल नहीं दी है। इसपर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आरएसएस से रूट का ब्योरा प्राप्त करें और कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए आवश्यक पाबंदियां लगाएं।

28 सितंबर से पहले मिलेगी अनुमति

28 सितंबर से पहले मिलेगी अनुमति

आरएसएस की ओर से पेश हुए एक और वकील राबू मनोगर ने कहा, 'आखिरकार कोर्ट ने कहा है कि पुलिस की ओर से आवश्यक शर्तें लगाए जाने के साथ अनुमति दी जाएगी।' उन्होंने बताया, 'अनुमति 28 सितंबर से पहले 50 स्थानों के लिए दी जानी चाहिए।' तमिलनाडु जैसे राज्य में अगर संघ को 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन अपना कार्यक्रम इतने बड़े स्तर पर आयोजित करने की अनुमति मिल रही है, तो इससे उसके स्वयं सेवकों में एक नया जोश पैदा होने की उम्मीद है।

संघ को बीजेपी का वैचारिक आधार माना जाता है

संघ को बीजेपी का वैचारिक आधार माना जाता है

उन्होंने यह भी बताया कि संघ की ओर से इस मार्च का आयोजन तीन कारणों से किया जा रहा है- विजयदशमी त्योहार (1925 में इसी दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का गठन डॉक्टर केशव बलीराम हेडगेवार ने किया था), बीआर अंबेडकर की 125वीं जयंती और भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर। संघ अपनी 100वीं वर्षगांठ की भी तैयारी कर रहा है, जो तीन साल बाद आने वाला है। आरएसएस को देश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है।

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