लोकसभा चुनाव 2019: वाराणसी में पीएम मोदी को रिकॉर्ड वोटों से जिताने के लिए बीजेपी और RSS ने बनाई खास रणनीति

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से उत्तरप्रदेश के वाराणसी से चुनाव मैदान में है। मोदी ने लोकसभा चुनाव 2014 में यहां से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए बड़ी जीत दर्ज की थी। भारतीय जनता पार्टी ने उनके चुनावी अभियान की निगरानी के लिए शहर के महमूरगंज इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के सेंकेंड फ्लोर पर 4,000 स्कवायर फीट के क्षेत्र में ऑफिस बनाया है। यहां से बीजेपी नेताओं को प्रचार के लिए पांच पेजों की बुकलेट दी जा रही है। इस बुकलेट में पिछले पांच सालों में वाराणसी में किए गए विकास कार्यों के बारे में बताया गया है। हालांकि विकास का मुद्दा जमीन पर बीजेपी के चुनावी अभियान की प्रभावी थीम नहीं है।

पार्टी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाया मुद्दा

पार्टी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाया मुद्दा

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 में राष्ट्रीय सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। बीजेपी अपने चुनावी अभियान में बता रही है कि आखिर क्यों आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए मोदी सरकार को वोट देने की जरूरत है। 25 अप्रैल को मोदी ने वाराणसी में अपने नामांकन से पहले एक रोड शो किया था। बीजेपी ने उनके स्वागत के लिए 100 से अधिक मंच बनवाए थे। इस दौरान फूलों की बारिश के साथ देशभक्ति की गाने बजाए गए। उस दिन वाराणसी में नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा उन्होंने साल 2006 में वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में हुए विस्फोट का जिक्र किया। मोदी के आने से पहले मंदिर में संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह आयोजित करवाया गया। इस दौरान विभिन्न आतंकी हमलों में मारे गए अधिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए कई कलाकार इकठ्ठा हुए और उनकी पेटिंग बनाई। इसमें मुंबई एटीएस के प्रमुख रह चुके हेमंत करकरे की पेंटिंग भी बनाई गई थी, जिसने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा। भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर की हेमंत करकरे पर की गई विवादित टिप्पणी से पार्टी ने दूरी बनाई।

'मोदी सरकार ने आतंकवाद को नियंत्रित किया'

'मोदी सरकार ने आतंकवाद को नियंत्रित किया'

बीजेपी के कार्यकर्ता संतोष का कहना है कि पिछले पांच सालों में वाराणसी में कई हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं। लोग इन चीजों को अपनी दैनिक जिंदगी में महसूस कर रहे हैं। लेकिन मतदाताओं को जागरुक किया जाना चाहिए कि मोदी सरकार ने आतंकवाद को नियंत्रित किया है और पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक की है। वहीं दूसरी तरफ लोक जागरण मंच के बैनर तले आरएसएस कार्यकर्ताओं का समूह मिलता जुलता अभियान चला रहा है। वो लोगों से राष्ट्रवादी पार्टी को समर्थन देने और उन लोगों को खारिज करने को कह रहे हैं, जिन्होंने सुरक्षाबलों की बहादुरी पर सवाल उठाए हैं।

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RSS को सता रहा है डर

RSS को सता रहा है डर

महमूरगंज स्थित आरएसएस दफ्तर के पदाधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि मोदी जी की जीत सुनिश्चित है। हम वोटिंग पर्सेंट बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। हमारी पहली चिंता है कि बीजेपी के पारंपरिक वोटर गर्मी में वोट देने के लिए घर से बाहर निकलने से बच सकते हैं क्योंकि वे मोदी की जीत के प्रति आश्वस्त हैं। दूसरी बात ये हैं कि हम जीत का अंतर बढ़ाने चाहते हैं। साल 2014 के चुनाव में मोदी को वाराणसी में 5.81 लाख वोट मिले थे। जबकि उनके खिलाफ लड़ने वाले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, जो दिल्ली के मौजूदा सीएम हैं उन्हें मोदी ने 3.7 लाख वोटों से हराया था। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वाराणसी लोकसभा के अंतर्गत आने वाली पांच में से चार सीटें जीती थीं और उसकी सहयोगी अपना दल ने एक सीट जीती थी। मोदी से पहले भी वाराणसी बीजेपी का गढ़ रहा है। 1991 से पार्टी यहां जीतती रही है। साल 2004 में कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा को जीत नसीब हुई थी। आरएसएस के पदाधिकारी जय प्रकाश जोर देकर कहते हैं कि मोदी जी इस बार ज्यादा वोटों से जीतेंगे। 2014 में केवल मोदी का नाम था। इस बार उनका नाम और काम दोनों हैं।

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