नागरिकता संशोधन एक्ट पर लालू यादव ने किया ये इमोशनल ट्वीट

लालू प्रसाद यादव ने अपना एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए एक इमोशनल ट्वीट किया है।

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    नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल के संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने इसपर अपनी मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल अब कानून बन गया है। हालांकि पूर्वोत्तर के दो राज्यों असम और त्रिपुरा में इस कानून के खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस कानून को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बिहार में भी सियासत गर्मा गई है। इस बिल पर जेडीयू के समर्थन करने के बाद आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपना एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए एक इमोशनल ट्वीट किया है।

    'मायूस मत होना अभी बीमार ज़िंदा है'

    'मायूस मत होना अभी बीमार ज़िंदा है'

    लालू प्रसाद यादव के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उनका एक पुराना वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो के साथ लालू प्रसाद यादव ने लिखा है-
    'अभी आँखों की शमाएं जल रही हैं उसूल जिंदा है
    आप लोग मायूस मत होना अभी बीमार ज़िंदा है,
    हजारों जख्म खाकर भी मैं दुश्मन के मुक़ाबिल हूँ
    खुदा का शुक्र अब तक दिल-ए-खुद्दार जिंदा है।'

    वीडियो में लालू प्रसाद यादव अल्पसंख्यकों और दलितों को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। लालू प्रसाद यादव फिलहाल चारा घोटोले में रांची की जेल में सजा काट रहे हैं।

    प्रशांत किशोर ने किया जेडीयू के रुख का विरोध

    आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल पर लोकसभा और राज्यसभा में जेडीयू ने सरकार का समर्थन किया है। हालांकि जेडीयू के इस कदम को लेकर पार्टी के भीतर ही विरोध के सुर उठ रहे हैं। जेडीयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने भी अपनी पार्टी के इस रुख का विरोध किया है। प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए कहा, 'संसद में बहुमत कायम रहा। अब न्यायपालिका से परे, भारत की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी 16 राज्यों के गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों के ऊपर है, क्योंकि ये वो राज्य हैं, जिन्हें इस बिल को लागू करना है। पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों ने नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी को नकार दिया है। अब समय आ गया है कि दूसरे गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपना रुख स्पष्ट करें।

    केरल, पश्चिम बंगाल और पंजाब ने एक्ट को नकारा

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    गौरतलब है कि केरल, पश्चिम बंगाल और पंजाब ने नागरिकता संशोधन कानून को अपने यहां लागू करने से मना कर दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा, 'यह कानून धर्मनिरपेक्षता के भारतीय चरित्र पर हमला है। कांग्रेस की सरकार, पंजाब विधानसभा में बहुमत के साथ इस कानून को लागू होने से रोग देगी। यह कानून बहुत ही विभाजनकारी है। कोई भी कानून जो देश के लोगों को धार्मिक तर्ज पर बांटना चाहता है, वह अवैध और अनैतिक है, इसलिए यह कानून पंजाब में लागू नहीं होगा।' वहीं, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि इस कानून में मुस्लिमों को भी जगह मिलनी चाहिए।

    'भारत की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक छवि पर हमला'

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    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा, 'यह कानून भारत की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक छवि पर हमला है। ऐसे असंवैधानिक कानून के लिए उनके राज्य में कोई जगह नहीं है। भारत का संविधान सभी भारतीयों के लिए नागरिकता के अधिकार की गारंटी देता है, चाहे उनका धर्म, जाति, भाषा, संस्कृति, लिंग या पेशा कुछ भी हो। नागरिकता (संशोधन) विधेयक के जरिए भारतीयों के इस अधिकार को शून्य किया जा रहा है। धर्म के आधार पर नागरिकता तय करने का यह कदम संविधान को अस्वीकार करने की कोशिश है।'

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