क्यों बढ़ रहा है हृदय रोग का खतरा, कम उम्र और ग्रामीण-गरीब आबादी भी चपेट में? जानिए
कम उम्र के लोग, गरीब और ग्रामीण इलाके लोग भी अब हृदय रोग से अछूते नहीं हैं। बल्कि, इनमें इसका जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस ट्रेंड पर चिंता जाहिर कर रहे हैं।

ध्रूमपान, मोटापा, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप या हाइपर्टेंशन को हृदय रोग का मुख्य कारक माना जाता है। परंपरागत रूप से यह मान्यता रही है कि यह सब समस्याएं शहरी अमीरों में ज्यादा देखने को मिलती हैं। लेकिन, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और अनुसंधान के आधार पर जो कुछ बताया है, उसके हिसाब से यह ट्रेंड तेजी से बदला है।
हृदय रोगियों का बदल रहा है ट्रेंड-शोध
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (2019-21) का जो तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है, उसके मुताबिक हृदय रोग का जोखिम गरीबों में भी बराबर है। कुछ मामलों में तो जरूरतमंद वर्गों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है, जबकि अमीरों में या तो यह स्थिति स्थिर है या उसमें गिरावट देखी गई है।
गरीबों में बढ़ रहा है खतरा-शोध
यह विश्लेषण भारत, अमेरिका और जर्मनी के स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने किया है, जिसके नतीजे द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ-ईस्ट एशिया में प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक ज्यादातर निम्न आय वाले देशों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज मृत्यु का प्रमुख कारण है।
15 से 49 आयु वर्ग के लोगों पर रिसर्च
शोधकर्ताओं ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 15 से 49 आयु वर्ग के व्यस्कों में हृदय रोग के जोखिम के कारकों की मौजूदगी के ट्रेंड का विश्लेषण किया है- स्मोकिंग (खुद से बताई हुई), ज्यादा वजन (बॉडी मास इंडेक्स 25 kgm2), डायबिटीज और हाइपर्टेंशन। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने की दवा खातें हैं।
हार्ट अटैक का खतरनाक ट्रेंड!
एक दिन पहले ही दुनिया ने वर्ल्ड इमरजेंसी मेडिसिन डे मनाया है। इस मौके पर मुंबई के एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप गोरे ने अपनी कैजुअल्टी यूनिट में लाए गए मरीजों के आंकड़ों का जो विश्लेषण किया, उसके नतीजे हार्ट अटैक के खतरनाक ट्रेंड दिखाते हैं।
40-50 उम्र के लोग आ रहे हैं चपेट में-डॉक्टर
इसके मुताबिक, हालांकि 50 से 60 की उम्र वाले हार्ट अटैक के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं, लेकिन 40 से 50 की उम्र के लोगों में जो हार्ट अटैक का ट्रेंड बढ़ा है, वह चौंकाने वाला है। मुंबई के मुलुंड स्थित फोर्टिस अस्पताल के इमरजेंसी रूम के हेड डॉक्टर गोरे ने बताया, '2011 से 2022 के बीच हार्ट अटैक का एडमिशन पांच गुना बढ़ गया और इस दौरान 40 से 50 की उम्र वाले मरीजों की संख्या 33% बढ़ी।'
हाल में सामने आए हैं चौकाने वाली खबरें
डॉक्टर गोरे ने जो डेटा दिए हैं, वह सिर्फ एक अस्पताल का है, इसलिए वह चाहते हैं कि सरकार भारत में युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों का विस्तार से अध्ययन करे। पिछले हफ्ते ही अभिनेता नितेश पांडे की 51 साल की आयु में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। यह सिर्फ एक अस्पताल की बात नहीं है। अनेकों अस्पताल के भी यही हाल हैं, जहां कम उम्र के हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी बताई जाती है।
बड़ी आबादी को गिरफ्त में ले रहा है हृदय रोग
यानि अभी तक के शोध और डॉक्टरों के अनुभव से तो यही लगता है कि हृदय रोग बहुत बड़ी आबादी को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है और यह अमीरी-गरीबी और बुढ़ापा-जवानी के दायरे को खत्म कर चुका है। बड़ा सवाल है कि इस स्थिति का कारण क्या है?
हृदय रोग में इजाफा के कारण
उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के फाउंडर डायरेक्टर डॉक्टर शुचिन बजाज ने कहा, 'हृदय रोग के जोखिम के लिए जिम्मेदार कारकों के बढ़ने के कई कारण हैं। सीमित स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में हृदय रोग की रोकथाम के लिए जागरूकता की कमी ने हृदय रोग के मामले बढ़ने में बड़ा रोल निभाया है।'
उन्होंने कहा है कि रोकथाम के लिए लाइफ स्टाइल संबंधी स्वस्थ बर्ताव को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही साथ शुरुआत में इसका पता लगाने और जोखिम के कारकों को नियंत्रित करने के प्रयासो से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, जिसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को भी बेहतर करना होगा।
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