रिजिजू ने 5 करोड़ से अधिक पेंडिंग कोर्ट केस पर जताई चिंता तो CJI रमना ने बताई ये वजह

Rijiju expressed concern over more than 5 crore pending cases, CJI Ramana gave special reason,रिजिजू ने 5 करोड़ से अधिक पेडिंग कोर्ट केस पर जताई चिंता तो CJI रमना ने बताई ये वजह

नई दिल्‍ली, 16 जुलाई: केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश भर की न्‍यायालयों में 5 करोड़ लंबित मामलों की संख्‍या पर चिंता जताई । इकसे बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना ने रिजिजू के बयान देश में बड़े पैमाने पर केस बैकलॉग के बयान पर प्रतिक्रिया दी है।

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सीजेआई ने शनिवार को 5 करोड़ की संख्‍या के पीछे प्रमुख कारण न्‍यायालयों में खाली पड़े पदों को बताया। उन्‍होंने कहा न्यायिक रिक्तियों को न भरना इसका प्रमुख कारण था। बता दें रिजिजू ने जयपुर में अखिल भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक में भाग लेते हुए लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा था कि लंबित मामले 5 करोड़ होने जा रहे हैं लेकिन न्यायपालिका और सरकार के बीच समन्वय से लंबित मामलों को कम किया जा सकता है। उन्‍होंने कहा लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य को हासिल करने के लिए सरकार और न्यायपालिका के बीच अच्छा तालमेल होना चाहिए।

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रिजजू की चिंता का जवाब देते हुए सीजेआई रमना ने कहा कि लंबित मामलों के संबंध में कानून मंत्री की टिप्पणियों का जवाब देना मेरी जिम्मेदारी है। मुझे खुशी है कि उन्होंने इस मुद्दें को उठाया है। हम जज भी करते हैं, जब हम देश से बाहर जाते हैं, तो हमारे सामने भी यही सवाल आता है कि केस कितने साल चलेगा?

उन्‍होंने कहा लंबित मामलों के कारणों को आप सभी जानते हैं। मुझे इसके बारे में विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। मैंने पिछले मुख्य न्यायाधीशों-मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इसका संकेत भी दिया था। आप सभी जानते हैं कि प्रमुख महत्वपूर्ण कारण न्यायिक रिक्तियों को न भरना और न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं करना है। रमना ने आपराधिक न्याय प्रणाली को प्रभावित करने वाले विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्‍या के "गंभीर" मुद्दे को उठाया और कहा उनके केस के निपटारे जल्‍द किए जाने चाहिए।

कानूनी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने की जरूरत है जो बिना किसी मुकदमे के लंबे समय तक कैद की ओर ले जाती हैं। सीजेआई ने कहा कि देश में 6.10 लाख कैदियों में से करीब 80 प्रतिशत विचाराधीन कैदी हैं और उन्होंने अफसोस जताया कि आपराधिक न्याय प्रणाली में प्रक्रिया ''एक सजा'' है। उन्होंने जेलों को ब्लैक बॉक्स कहा और कहा कि जेलों का विभिन्न कैटेगरी के कैदियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। इसके साथ सीजीआई ने कहा क्रिमिनल ज्‍यूडिसियरी में प्रक्रिया एक सजा है। उन्‍होंने सलाह दी कि अंधाधुंध गिरफ्तारी से लेकर जमानत पाने में कठिनाई तक, विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक जेल में रखने की प्रक्रिया पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

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