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100 फीसदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 1985 में फैजाबाद में हुई थी

बेंगलुरू। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की रहस्य से पर्दा अब उठ सकता है। केंद्र की मोदी सरकार ने नेताजी के अहम दस्तावेजों को उजागर करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किय है। जो आज बैठक के बाद इस बात का फैसला लेगी कि इन दस्तावेजों को उजागर करना है या नहीं।

subhash chandra bose

वहीं भारत के हर एक नागरिक की यह जानने की जिज्ञासा है कि कि नेता जी की मृत्यु कैसे हुई थी। नेता जी की मृत्यु एक विमान हादसे में हुई थी या स्टालिन ने उनकी हत्या की थी या फिर वो फैजाबाद में 1985 में अपनी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी।

इंडियाज बिगेस्ट कवर अप किताब के लेखक अनुज धर ने वनइंडिया से बात करते हुए इस बात का दावा है कि नेताजी की मृत्यु विमान हादसे में नहीं बल्कि प्राकृति मृत्यु हुई थी। धर सौ फीसदी इस बात से आश्वस्त हैं कि नेताजी की मृत्यु 1985 में फैजाबाद में हुई थी।

बोस के बारे में बहुत सी कहानियां आप किसे सही मानते हैं?

मुझे पूरा विश्वास है कि नेता जी की मृत्यु 1985 में फैजाबाद में हुई थी। नेताजी ने अपनी अंतिम सांस फैजाबाद में कई साल रहने के बाद ली। 16 सितंबर 1985 को नेताजी ने अपनी आखिरी सांस ली थी। नेता जी को भगवान जी के नाम से जाना जाता था और वहां के सभी स्थानीय लोग जानते थे कि वह कोई और नहीं बल्कि नेताजी ही हैं।

सरकार ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनायी आपकी इस पर क्या राय है?

मेरा मानना है कि सरकार समय जाया करने के लिए इस कमेटी को बना रही है। इस कमेटी के जरिए यह सरकार और समय बर्बाद करना चाहती है। आईबी और रिसर्च एनालिसिस विंग में कई ऐसे लोग हैं जो अपने पूर्व के मालिकों को बचाना चाहते हैं। पूरे देश को नेताजी के बारे में गलत जानकारी दी गयी। जो भी इस सच को सामने लाने के लिए आगे आया उसे गद्दार करार दिया गया।

धर का कहना है कि अगर नेता जी की मौत विमान हादसे में हुई थी तो इस मामले में छिपाने के लिए कुछ भी नहीं था। ऐसे में नेताजी के दस्तावेजों को खुफिया तरीके से क्यों रखा गया इसकी कोई वजह नहीं है।

आपको कमेटी से क्या उम्मीद है?

मुझे नहीं लगता यह कमेटी कुछ भी करेगी। यह कमेटी कुछ चुनिंदा दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगी। मेरे मानना है कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। नेता जी ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई है उनका सम्मान होना चाहिए।

क्या कोई महात्मा गांधी से जुड़े दस्तावेजों को छिपा सकता है। नहीं कोई भी ऐसा करने की कभी सोच भी नहीं सकता है। मुझे नहीं लगता कि यह कमेटी कभी भी बोस के सबी दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगी।

सरकार को बोस के बारे में क्या पता है?

15 साल की खोजबीन के बाद मेरा मानना है कि सरकार को यह बहुत अच्छे से पता है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी।

सरकार क्या छिपाना चाहती है?

सरकार को लगता है कि अगर सच्चाई सामने आयी तो देश में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है खासकर पश्चिम बंगाल में। लेकिन सच को छिपाने का यह कोई तर्क नहीं हो सकता है। धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावना रहती है, तो क्या इसका मतलब यह है कि इन कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

सरकार अपनी बड़ी आलोचना से बचना चाहती है। हाल ही में बोस के 2 दस्तावेज सामने आये हैं जिसके बाद लोगों की प्रतिक्रिया से सरकार डरी हुई है। आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि जब सभी दस्तावेज सामने आयेंगे तो क्या हो सकता है।

क्या सरकार को फैजाबाद के बारे में पता है?

बिल्कुल सरकार को इस बारे में पता है कि बोस फैजाबाद में ही थे। सरकार उनसे हमेशा संपर्क में थी और उनसे मिलने के लिए अपने सदस्यों को भेजा करती थी। लेकिन सरकार के दबाव के चलते नेताजी लोगों के सामने नहीं आ सके।

सरकार कभी यह नहीं चाहती थी कि नेता लोगों के सामने आये और देश को उनकी सच्चाई के बारे में पता चले। यकीन मानिये जब मैं यह कह रहा हूं तो इसमें सच्चाई है, यही नहीं फील्ड मार्शल सैम मानिकशॉ और रॉ के पूर्व मुखिया आरएन के भी उनसे मिलने फैजाबाद गये थे।

सरकार उन्हे सामने क्यूं नहीं आने देना चाहती थी?

बोस को सामने नहीं आने देने के पीछे सिर्फ नेहरू और उनकी सुरक्षा ही एक कारण नहीं था। अगर नेता जी सामने आते तो महात्मा गांधी के धरोहर को बड़ा खतरा हो सकता था। सरकार को इस बात का अंदाजा था कि इतने सालों के बाद अगर सच्चाई सामने आयी तो सब कुछ इस सरकार के लिए खत्म हो जाएगा।

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