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ISIS में 'कूल' यंगस्‍टर्स को नहीं आईपॉड चार्ज करने की मंजूरी

मुंबई। पिछले दिनों इराक से भारत लौटे कल्‍याण महाराष्‍ट्र के आरीफ मजीद की वापसी यह साबित करती है कि आईएसआईएस झूठे सपने दिखाकर भारत से युवाओं की भर्ती कर रहा है। आरीफ एक इंजीनियर है और जो आज के दौर में मौजूद हर लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी का प्रयोग करता है।

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आरीफ की ही तरह कई युवा ऐसे हैं जिनके पास अच्‍छी खासी शि क्षा है और वे भी आईपॉड जैसे लेटेस्‍ट गैजेट्स प्रयोग करते हैं। लेकिन इन लड़कों को अपने गैजेट्स का प्रयोग करने की सख्‍त मनाही है। फ्रांस से गया एक युवा इस बात से दुखी है कि उसे अपना आईपॉड तक चार्ज नहीं करने दिया जाता है।

हकीकत दिल दुखाने वाली

भारतीय युवाओं की तरह अपना घर छोड़कर आईएसआईएस के मकसद के लिए सीरिया और इराक पहुंचे युवाओं को हकीकत समझ आ गई है। सिर्फ आरीफ मजीद अकेला ऐसा युवक नहीं है जिसने अपनी भर्ती के बाद आईएसआईएस की ओर से उससे टायॅलेट तक क्‍लीन कराने की बात कही है।

कई और दूसरे देशों के युवाओं को भी इसी तरह के काम कराए जा रहे हैं और वे भी या तो अपने वतन वापस लौटना चाहते हैं या फिर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

आईपॉड न चलने से दुखी हैं लड़के

भारत के अलावा दुनिया के कई देशों के युवा आईएसआईएस के कमांडर बगदादी की एक अपील पर अपना घर छोड़कर इराक तो जा पहुंचे लेकिन वहां पहु्ंचकर उन्‍हें इस बात का अहसास हुआ कि तस्‍वीर पूरी तरह से जुदा है।

फ्रांस से जिन युवाओं की भर्ती की गई थी वह भी अब या तो आईएसआईएस के कहने पर टॉयलेट साफ कर रहे हैं या फिर पानी भरने का काम कर रहे हैं। यहां तक कि एक लड़ाके ने जब अपने घर में चिट्ठी लिखी तो उसने लिखा कि उसका आईपॉड ही नहीं काम कर रहा और साथ ही माहौल उसके रहने के लायक बिल्‍कुल भी नहीं है।

यह सारे युवा अब अपने घर जाने को बेकरार है। यहां यह बात भी काफी हास्‍यापद लगती है कि जो लड़ाके अपने घर पर इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उनका आईपॉड नहीं चल रहा वही अपनी बहनों को यह कहते हुए टीवी देखने से रोकते थे कि यह इस्‍लाम के खिलाफ है।

ब्रिटेन और लोकल लड़ाके आईएसआईएस की पसंद

मजीद ने पिछले दिनों जो कुछ भी पिछले दिनों पूछताछ में बताया है उसके बाद से यह लगने लगा है कि आईएसआईएस के लिए गए लाखों युवाओं को संगठन के कैंपों में काफी परेशान हो रही है। कैंप में दूसरे देशों से आए लड़ाकों को लोकल लड़ाकों के आगे बिल्‍कुल भी तरजीह नहीं दी जाती है।

आईएसआईएस सिर्फ लोकल फाइटर्स या फिर उन लड़ाकों को तरजीह दे रहा है तो ब्रिटेन से आए हैं। बाकी लड़ाकों को वह तुच्‍छ नजर से देखता है और उन्‍हें ऐसे काम करने को देता है जिसकी कल्‍पना उन्‍होंने सपने में भी नहीं की होती है। यह युवा आईएसआईएस के लिए लड़कियों का इंतजाम करते हैं या फिर जासूसी करने का काम करते हैं।

सीनियर मेंबर्स उठाते हैं म्‍यूजिक का मजा

ज्‍यादातार युवाओं ने यह सोचकर आईएसआईएस को ज्‍वॉइन किया था कि ट्रेनिंग के बाद उन्‍हें भी आईएसआईएस लड़ाई के लिए कहेगा। लेकिन सिर्फ एके-47 के साथ कुछ फोटोग्राफ के अलावा उनके हाथ कुछ भी नहीं आया।

युवाओं को यह बात समझते देर नहीं लगी कि उन्‍हें सिर्फ एक झूठा सपना दिखाया गया था और अब यह सपना टूट गया है। इन युवाओं का तब और ज्‍यादा तकलीफ होती जब संगठन के वरिष्‍ठ सदस्‍य वह सारे काम करते जिसे करने के लिए इन लोगों को मनाही थी।

यह सीनियर मेंबर म्‍यूजिक का लुत्‍फ उठाते और यहां तक कि जमकर आराम करते। फ्रांस से गए एक युवा की मानें तो उसे उसका आईपॉड तक चार्ज करने की इजाजत नहीं थी।

वीडियो देखने के बाद हकीकत बर्दाश्‍त नहीं

मजीद के बयानों के बाद यह बात भी काफी हद तक साफ हो गई है कि आईएसआईएस के लिए गए युवा संगठन की ओर से दिखाई जा रही निर्दयता को लेकर भी काफी परेशान हैं।

मजीद ने जो जानकारी दी है कि उसके मुताबिक संगठन महिलाओं का बलात्‍कार करता और उनके साथ बुरा बर्ताव करता। मजीद यह सबकुछ बर्दाश्‍त नहीं कर सका। मजीद ने माना कि जब युवा आईएसआईएस के वीडियो को इंटरनेट पर देखते हैं तो वह उसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं लेकिन बहुत से लोग हकीकत में उन बातों को झेल नहीं पाते हैं।

साफ है कि धीरे-धीरे आईएसआईएस की हकीकत सामने आ रही है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में युवाओं का ध्‍यान भी मजीद की तरह आईएसआईएस से हट जाए।

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