6 करोड़ EPF खाताधारकों को झटका, ब्याज दर में कटौती, 40 साल का रिकॉर्ड टूटा
नई दिल्ली, 12 मार्च: मोदी सरकार ने देश के करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। जिसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपनी ब्याज दर में कटौती की है। अब पीएफ अकाउंट में जमा राशि पर 8.5% ब्याज की जगह सिर्फ 8.1 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। ये चार दशकों की सबसे कम ब्याज दर है। इससे पहले 1977-78 में ईपीएफ की ब्याज दर 8 फीसदी थी।

6 करोड़ कर्मचारी होंगे प्रभावित
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने पीएफ खाते पर मिलने वाला ब्याज घटा दिया है। उन्होंने अब 8.5 प्रतिशत की जगह 8.1 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला लिया है। ये 40 साल की सबसे कम ब्याज दर है। जल्द ही इस पर वित्त मंत्रालय भी हामी भर देगा। इस फैसले से देशभर के कुल 6 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित होंगे।

क्या होता है PF?
कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद के जीवन को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का गठन किया था। इसके तहत सभी ऑनरोल कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट होना अनिवार्य है। इस खाते में सैलरी का एक निश्चित हिस्सा जमा किया जाता है। उतना ही पैसा कंपनी भी उसी खाते में जमा करती है। जिस पर हर साल सरकार की ओर से तय ब्याज मिलता है। जब कर्मचारी रिटायर होता है या नौकरी छोड़ता है तो वो पीएफ अकाउंट से सारा पैसा निकाल सकता है।

पिछले कुछ सालों की ये थी दर
वित्त वर्ष 2019-20: 8.5%
2020-21: 8.5%
2018-19: 8.65%
2017-18: 8.55%
2016-17: 8.65%
2015-16: 8.8%

वित्त मंत्रालय करेगा समीक्षा
आपको बता दें कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी एक त्रिपक्षीय इकाई है। जिसमें सरकार, कर्मचारी और नियोक्ता संगठन के प्रतिनिध शामिल होते हैं, जबकि श्रम मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं। जब भी सीबीटी कोई फैसला लेता है, तो ईपीएफओ को उसे मानना अनिवार्य होता है। हालांकि अभी वित्त मंत्रालय इस फैसले की समीक्षा करेगा, उसके बाद ही इस पर अंतिम फैसला होगा।












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