मोदी कैबिनेट फेरबदल: इस्तीफा मंजूर हुआ तो क्या होगा उमा भारती की उस 'भीष्म प्रतिज्ञा' का?
केंद्रीय जल संसाधन और गंगा सफाई मामलों की मंत्री उमा भारती ने इस्तीफे की पेशकश की है। मोदी कैबिनेट फेरबदल से ऐन पहले उमा भारती की ओर की गई इस्तीफे की पेशकश के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए जा रहे हैं। इस्तीफे के पीछे की वजह स्वास्थ्य कारण ही हैं या कुछ और? यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हुआ तो उमा भारती की वो 'भीष्म प्रतिज्ञा' टूट जाएगी, जो कि उन्होंने गंगा सफाई को लेकर की थी।

ये थी उमा भारती की 'भीष्म प्रतिज्ञा'
बात ज्यादा पुरानी नहीं है। फरवरी 2017 में उमा भारती से गंगा सफाई को लेकर सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उमा भारती ने कहा था, 'गंगा साफ नहीं करवा पाई तो प्राण त्याग दूंगी।'

गंगा को निर्मल बनाना जीवन का लक्ष्य
उमा भारती ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, 'कांग्रेस सरकारों की उपेक्षा के कारण गंगा निर्मलीकरण के नाम पर सरकारी धन की लूट हुई। मां गंगा के साथ करोड़ों भारतीयों के साथ मेरी भी आस्था जुड़ी है। मोदी सरकार आने के बाद मां गंगा का निर्मलीकरण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। गंगा के पानी को निर्मल बनाना मेरे जीवन का लक्ष्य है। यदि मेरे कार्यकाल में गंगा का पानी निर्मल नहीं हुआ तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगी।' इसी बातचीत के दौरान उमा ने प्राण देने की बात भी कही थी।

अगर कबूल हो गया इस्तीफा
अब सवाल यह है कि अगर जल संसाधन और गंगा सफाई मंत्री उमा भारत का इस्तीफा का कबूल हो गया तो उनका लक्ष्य/भीषण प्रतिज्ञा अधूरी रह जाएंगी, क्योंकि गंगा अभी तक निर्मल नहीं हुई है।

अब सवाल यह है कि अगर जल संसाधन और गंगा सफाई मंत्री उमा भारत का इस्तीफा का कबूल हो गया तो उनका लक्ष्य/भीषण प्रतिज्ञा अधूरी रह जाएंगी, क्योंकि गंगा अभी तक निर्मल नहीं हुई है।
अब हम थोड़ा और पीछे चलते हैं। बात उस वक्त की है, जब नरेंद्र मोदी पीएम नहीं थे बल्कि पीएम कैंडिडेट थे। अप्रैल 2014 में वह नामांकन भरने के लिए वाराणसी गए थे। उस वक्त नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'मुझे किसी ने न भेजा है और न ही मैं स्वयं यहां आया हूं...मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। मैं ऐसा ही महसूस कर रहा हूं, जैसे एक बच्चा अपनी मां की गोद में आने पर महसूस करता है।'

कहीं उमा भारती के खराब रिपोर्ट से नाराज तो नहीं पीएम मोदी
पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गंगा सफाई के लिए अलग से मंत्रालय बनाया और उमा भारती को यह बेहद खास जिम्मेदारी सौंपी थी। खुद नरेंद्र मोदी ने कई बार गंगा सफाई का वादा किया। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि कहीं खराब रिपोर्ट कार्ड के चलते उमा भारती को गंगा सफाई मंत्रालय से अलग तो नहीं किया जा रहा ? क्योंकि 2019 बेहद करीब है और गंगा सफाई के मोर्चे पर उमा भारती के हाथ अभी तक कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, जबकि मोदी सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए बजट में कोई कसर नहीं छोड़ी है।












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