Republic Day 2026: 21 तोपों की सलामी-29 विमानों का ‘वज्र’, क्यों अलग है इस बार का गणतंत्र दिवस?
Republic Day 26 January 2026: आज देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ मना रहा है। कर्तव्य पथ पर तिरंगे की लहरों के बीच भारत ने न सिर्फ अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि हम सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस बार का गणतंत्र दिवस कई मायनों में ऐतिहासिक है। खासकर इसलिए कि यह 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे होने का साल है।
परेड में 21 तोपों की सलामी से लेकर आसमान में 29 विमानों का 'वज्र' फॉर्मेशन तक - कई ऐसी चीजें पहली बार हुईं, जो दुश्मनों के कान में भारत की गूंज बनकर गूंज रही हैं। आइए इन 5 अनोखी बातों को विस्तार से समझते हैं...

1. पहली बार पूरी तरह स्वदेशी तोपों से 21 तोपों की सलामी (21-Gun Salute)
गणतंत्र दिवस पर परंपरागत रूप से 21 तोपों की सलामी दी जाती है। लेकिन इस बार यह सलामी पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' की ताकत से दी गई। दशकों पुराने ब्रिटिश पाउंडर गन्स की जगह अब भारत में बनी 105 mm लाइट फील्ड गन्स का इस्तेमाल हुआ। ये तोपें स्वदेशी तकनीक से बनी हैं और युद्ध के दौरान भी इनका इस्तेमाल हो सकता है। यह सलामी न सिर्फ सम्मान का प्रतीक थी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सैन्य शक्ति का भी प्रदर्शन था।
2. पहली बार 'Combat Ready Formation' में Parade
इस साल भारतीय सेना की टुकड़ियां परेड में सामान्य मार्चिंग के बजाय 'कॉम्बैट रेडी फॉर्मेशन' में आईं। यानी वे वैसी ही मुद्रा और गियर में परेड कर रही थीं, जैसी वे युद्ध के मैदान में अपनाते हैं। नई छलावरण वाली वर्दी, आधुनिक हथियार और युद्ध के लिए तैयार लुक - यह दुनिया को स्पष्ट संदेश था कि भारतीय सेना किसी भी समय तैयार है। यह पहली बार हुआ जब परेड में इतने युद्ध-तैयार फॉर्मेशन देखने को मिले।
3. आसमान में पहली बार 'वज्र' आकार - 29 विमानों का शानदार फ्लाईपास्ट
वायुसेना के फ्लाईपास्ट ने इस बार सबका दिल जीत लिया। 29 विमानों ने आसमान में 'वज्र' (Vajra- Thunderbolt) की आकृति बनाई। इसमें राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस, प्रचंड हेलीकॉप्टर और अन्य स्वदेशी विमान शामिल थे। यह अब तक का सबसे जटिल और शानदार हवाई प्रदर्शन माना जा रहा है। 'वज्र' का प्रतीक भारत की ताकत और दुश्मनों पर प्रहार करने की क्षमता को दर्शाता है।
4. पहली बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता एक साथ मुख्य अतिथि
गणतंत्र दिवस के इतिहास में पहली बार यूरोपीय संघ (EU) के दो सबसे बड़े पदों पर बैठे नेताओं - यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष - को एक साथ मुख्य अतिथि बनाया गया। यह भारत और यूरोप के बीच बढ़ते व्यापारिक, रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की मिसाल है। इस कदम से भारत का वैश्विक कद और मजबूत हुआ।
5. पहली बार 'Bhairav Light Commandos' का डेब्यू
इस साल कर्तव्य पथ पर सेना की नई स्पेशल यूनिट 'भैरव लाइट कमांडो' ने पहली बार कदम रखा। यह यूनिट शहरी इलाकों और कठिन भौगोलिक स्थितियों में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। इनका रहस्यमयी लुक, आधुनिक गियर और तालमेल इस परेड का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। यह यूनिट भारत की स्पेशल फोर्सेज की नई ताकत का प्रतीक है।
अतिरिक्त खास बातें
- 30 झांकियां: 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की झांकियां।
- 10,000 विशेष अतिथि: बौद्ध भिक्षु, ग्रामीण कारीगर, आत्मनिर्भर लाभार्थी और वीर गाथा विजेता छात्र।
- थंडरबोल्ट दल: मोटरसाइकिलों पर सशस्त्र बलों का अद्भुत संतुलन प्रदर्शन।
यह गणतंत्र दिवस सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रदर्शन था। दुश्मनों के कान में भारत की गूंज आज और भी तेज सुनाई दे रही है। जय हिंद!












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