Regional Rural Bank: 1 मई से ग्रामीण बैंकों में बड़ा बदलाव, जानिए 15 बैंकों के विलय से खातों पर क्या होगा असर
Regional Rural Bank: ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाओं को बेहतर और अधिक सुलभ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देशभर में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Bank RRB) की संख्या को घटाने का निर्णय लिया गया है जो 1 मई 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के तहत 'वन स्टेट-वन आरआरबी' (One State-One RRB) नीति को लागू किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स की मानें तो वर्तमान में देश भर में 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक हैं जो 26 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 22,069 शाखाओं के माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 92 प्रतिशत शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इन बैंकों का प्रमुख उद्देश्य किसानों, मजदूरों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
Regional Rural Bank: किस राज्यों में होगा विलय?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे 11 राज्यों में यह बड़ा बैंकिंग सुधार लागू किया जाएगा। इन राज्यों में मौजूद सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय कर प्रत्येक राज्य में केवल एक आरआरबी बैंक बनाया जाएगा।
विलय की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
आंध्र प्रदेश:
राज्य के चैतन्य गोदावरी ग्रामीण बैंक, आंध्र प्रगति ग्रामीण बैंक, सप्तगिरी ग्रामीण बैंक और आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास बैंक का विलय कर आंध्र प्रदेश ग्रामीण बैंक बनाया जाएगा। इसका मुख्यालय अमरावती में होगा और प्रायोजक बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया होगा।
उत्तर प्रदेश:
यूपी के बड़ौदा यूपी बैंक, आर्यावर्त बैंक और प्रथम यूपी ग्रामीण बैंक को मिलाकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का गठन किया जाएगा जिसका मुख्यालय लखनऊ में होगा।
पश्चिम बंगाल:
बंगीय ग्रामीण विकास बैंक, वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक और नॉर्थ बंगाल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का एकीकरण कर पश्चिम बंगाल ग्रामीण बैंक बनाया जाएगा।
बिहार:
साउथ बिहार ग्रामीण बैंक और नॉर्थ बिहार ग्रामीण बैंक का विलय कर बिहार ग्रामीण बैंक का गठन किया जाएगा। इसका प्रायोजक बैंक पंजाब नेशनल बैंक होगा।
गुजरात:
राज्य के बड़ौदा गुजरात ग्रामीण बैंक और सौराष्ट्र ग्रामीण बैंक को मिलाकर गुजरात ग्रामीण बैंक का निर्माण होगा।
कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में भी इसी तरह दो-दो आरआरबी बैंकों का विलय कर एक नया बैंक बनाया जाएगा।
नए आरआरबी बैंक कैसे होंगे?
इन नए आरआरबी बैंकों की अधिकृत पूंजी 2,000 करोड़ रुपये होगी। जिससे इनका प्रबंधन और संचालन अधिक कुशल होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहकों को बेहतर और समय पर सेवाएं मिल सकेंगी। इसके साथ ही डिजिटल बैंकिंग, क्रेडिट सुविधा और वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
Regional Rural Bank: ग्राहकों पर क्या होगा असर?
जो ग्राहक पहले से किसी मौजूदा आरआरबी के साथ जुड़े हैं, उनके लिए खातों और सेवाओं में कोई बड़ी दिक्कत नहीं आएगी। शाखाएं पहले की तरह काम करती रहेंगी और खाताधारकों को सभी जरूरी सूचनाएं बैंक की ओर से समय पर दी जाएंगी। विलय के बाद बैंकों की तकनीकी और ग्राहक सेवा प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
पहले भी हो चुका है विलय: यह है चौथा चरण
देश में यह पहली बार नहीं है जब क्षेत्रीय ग्रामिण बैंकों का विलय हो रहा है। इससे पहले भी इस तरह से बैंकों को मर्ज्ड किया गया है। भारत में तीन चरणों में विलय प्रक्रिया हो चुकी है:
पहला चरण (2006-2010): 196 बैंकों की संख्या घटाकर 82 कर दी गई थी।
दूसरा चरण: इस दौरान कई छोटे विलय हुए।
तीसरा चरण: बैंकों की संख्या 56 से घटाकर 43 की गई।
अब चौथा चरण (2025): इसके बाद देश में कुल 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रह जाएंगे।
Regional Rural Bank: वित्तीय प्रदर्शन और सरकार की पूंजी सहायता
वित्तीय वर्ष 2023-24 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने 7,571 करोड़ रुपये का संयुक्त लाभ कमाया, जो अब तक का सर्वोच्च है। मार्च 2024 तक इन बैंकों का कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेश्यो (CRAR) 14.2 प्रतिशत था और ग्रॉस एनपीए (GNPA) 6.1 प्रतिशत, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम रहा है। सरकार ने वर्ष 2021-22 में इन बैंकों को मजबूत करने के लिए 5,445 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश योजना भी चलाई थी।
आरआरबी अधिनियम और पूंजी ढांचा
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना 1976 में आरआरबी अधिनियम के तहत की गई थी। 2015 में संशोधित अधिनियम के अनुसार, अब ये बैंक निजी स्रोतों से भी पूंजी जुटा सकते हैं। इन बैंकों में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत, प्रायोजक बैंक की 35 प्रतिशत और राज्य सरकार की 15 प्रतिशत होती है।












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