कोटा में बच्चों की मौत पर बड़ा खुलासा, टूटे गेट और गंदे अस्पताल में घूम रहे थे सुअर
कोटा। राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में इस साल 940 बच्चों की मौत हुई है। केवल दिसंबर महीने में ही बच्चों की मौत का आंकड़ा 91 हो गया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि केवल उन्हीं बच्चों की मौत हुई है, जो बहुत नाजुक स्थिति में अस्पताल लाए गए थे। इनमें कुछ ऐसे थे जो जन्म के साथ ही कमजोर थे और किसी दूसरे अस्पताल से सरकारी अस्पताल में लाए गए।

टीम ने अस्पताल का दौरा किया
लेकिन अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की टीम ने अस्पताल का दौरा कर बच्चों की मौत के पीछे के कारणों को जानने की कोशिश की। जो चीजें सामने आईं वो चौंका देने वाली हैं। आयोग ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी कर कार्रवाई की मांग की है। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानुंगो ने कहा, 'ये स्पष्ट है कि अस्पताल की खिड़कियों पर शीशे नहीं हैं, दरवाजे टूटे हुए हैं, यही वजह है कि जिन बच्चों को यहां इलाज के लिए भर्ती कराया गया उनकी सेहत को खराब मौसम से नुकसान पहुंचा।'

रखरखाव 'सबसे खराब स्थिति' में है
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल का सामान्य रखरखाव 'सबसे खराब स्थिति' में है। कानुंगो ने नोटिस में कहा है, 'अस्पताल के परिसर में सुअर घूमते हुए देखे गए हैं। यहां स्टाफ की भारी कमी है।' आयोग अध्यक्ष ने तीन दिन के भीतर कार्रवाई की मांग की है।

कई कमियां उजागर हुई हैं
वहीं राजस्थान चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया ने बताया कि अस्पताल में कई कमियां उजागर हुई हैं। इनमें साफ सफाई, वार्डों में संक्रमण और आईसीयू में ऑक्सीजन अपर्याप्त आपूर्ति व महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की कमी आदि शामिल हैं। जेके लोन अस्पताल कोटा के प्रशासन को नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) के लिए ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछाने के साथ-साथ अस्पताल में आवश्यक उपकरणों के लिए प्रकिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।












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