क्या होता है सर्कुलेशन से नोट गायब होने का मतलब? 5 स्टेप में समझें
आरबीआई ने 2000 रुपए के नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का ऐलान किया है। अब 30 सितंबर तक बैंकों में वापस कर सकेंगे। आरबीआई के इस फैसले से 2016 के नोटबंदी की याद दिला दी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2000 रुपए के नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का फैसला ले लिया है। साथ ही आरबीआई ने यह भी साफ कहा है कि इसका मतलब इन नोटों की वैधता समाप्त होना न समझें। फिलहाल 2000 रुपये के नोट चलते रहेंगे। अब 30 सितंबर तक बैंकों में वापस किए जा सकते हैं। आरबीआई के इस फैसले ने साढ़े छह साल पहले नोटबंदी की यादों को ताजा कर दिया है। आइए समझें करंसी नोट के बनने से नष्ट होने तक का सफर 5 स्टेप में...
स्टेप-1
आरबीआई सेंट्रल बोर्ड और केंद्र सरकार की सलाह से हर साल तय करता है कि किस डिनॉमिनेशन के कितने नोट छापे जाएं।
स्टेप-2
आरबीआई नासिक(महाराष्ट्र), मैसूर(कर्नाटक), देवास (मध्य प्रदेश), और सालबनी (पश्चिम बंगाल) स्थित करंसी प्रिटिंग प्रेस को छपाई के ऑर्डर देता है।
स्टेप-3
छपने के बाद नोट बैंकों को बांटे जाते हैं। इसके लिए 19 शहरों में आरबीआई के करंसी इश्यू आफिस हैं। इसके अलावा शेड्यूल बैंकों के 3054 चेस्ट ब्रांच के जरिए भी बैंकों को नोट दिए जाते हैं।
स्टेप-4
बैंक नए नोटों को लोगों तक पहुंचाते हैं। हर विड्रॉल पर जरूरत के हिसाब से नए नोट दिए जाते हैं।
स्टेप- 5
लोगों के हाथ से गुजरने में नोट डैमेज होता है। 500 और 2000 के नोट आमतौर पर 5 से 7 साल तक ही चल पाते हैं। लगातार सर्कुलेशन में रहा कोई ज्यादा घिसा या फटा नोट बैंक में पहुंचता है, तो उसे आरबीआई भेजा जाता है। आरबीआई क्वालिटी चेक करती है। साथ ही यह विचार करती है कि नोट रि इश्यू किया जाए या नष्ट कर दिया जाए।
क्या होता है नोट गायब होने का मतलब ?
एक समय अवधि में प्रिंट नोटों की संख्या से नष्ट किए गए नोटों की संख्या घटा दें तो बचे नोट सर्कुलेशन में होने चाहिए। असल में सर्कुलेशन में चल रहे नोटों की संख्या कम हो तो मतलब है कि बाकी नोट बैंकिंग सिस्टम से गायब है।












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