आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल नहीं बता पाए, 71 दिन बाद कितना पैसा बैंकों के पास वापस लौटा
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल संसद की वित्त मामलों की समिति को यह नहीं बता पाए कि बैंकों में अभी तक कितना रुपया वापस आ चुका है।
नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल संसद की वित्त मामलों की समिति को यह नहीं बता पाए कि बैंकों में अभी तक कितना रुपया वापस आ चुका है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में टीएसमी सांसद और संसद की वित्त मामलों की समिति के सदस्य सौगत रॉय ने बताया कि आरबीआई गवर्नर इस बात की जानकारी नहीं दे पाए कि विमुद्रीकरण के फैसले के बाद कितना रुपया वापस बैंकों में आ चुका है।

साथ ही वो यह भी नहीं बता पाए कि विमुद्रीकरण के बाद कब तक परिस्थितियां सामान्य होगी। उन्होंने बताया कि आरबीआई के अधिकारी संसद की वित्त मामलों की समिति के सामने बचाव करते दिखे। वहीं आरबीआई गवर्नर ने संसद की वित्त मामलों की समिति को यह जानकारी दी कि अभी तक बाजार में 9.2 लाख करोड रुपए की नई करेंसी ही बाजार में जारी की जा चुकी है। इस दौरान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने संसदीय पैनल को बताया कि विमुद्रीकरण के फैसले के बाद अर्थव्यवस्था पर क्या असर हुआ है और इसको लेकर आरबीआई ने अभी तक क्या निर्णय किए हैं। इस दौरान वित्त मंत्रालय के कई अधिकारी भी मौजूद थे। इस संसदीय पैनल की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली कर रहे थे। इस दौरान संसदीय पैनल के सामने इंडियन बैंक एसोसिएशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के अधिकारी भी मौजूद थे। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को 20 जनवरी को अब संसद की लोक लेखा समिति के सामने पेश होना है, जहां पर उनसे विमुद्रीकरण को लेकर सवाल किए जाएंगे।
राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आरबीआई की स्वायत्ता पूरी तरह से खत्म हो गई है और अब वो सरकार कर रबर स्टाम्प बनकर रह गई है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर मैं कहीं आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को देखूंगा तो उन्हें पहचान नहीं पाऊंगा, क्योंकि मुश्किल से ही टेलीविजन चैनलों और समाचार पत्रों में दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को इस्तीफा दे देना चाहिए।












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