क्या रतन टाटा को नहीं पसंद था सरप्राइज? शांतनु नायडू ने बताई सच्चाई
Ratan Tata: 86 साल की उम्र में उद्योगपति रतन टाटा का 09 अक्टूबर 2024 को निधन हो गया। रतन टाटा अब हमारी बीच में नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानियां अभी भी जीवित हैं। ऐसी ही एक कहानी रतन टाटा के बेहद करीबी माने जाने वाले शांतनु नायडू (Shantanu Naidu) ने बयां की।
शांतनु नायडू ने 2021 में लिखी अपनी आत्मकथा 'आई केम अपॉन ए लाइटहाउस: ए शॉर्ट मेमॉयर ऑफ लाइफ विद रतन टाटा' में अपने गुरु रतन टाटा को "अंतर्मुखी" बताया। नायडू न केवल टाटा के सहायक थे, बल्कि उनके करीबी विश्वासपात्र और दाहिने हाथ थे। शांतनु नायडू ने रतन टाटा के अंतिम संस्कार के बाद वे काफी भावुक नजर आए थे।

शांतनु नायडू ने 2021 में लिखे अपने संस्मरण में रतन टाटा के जीवन की एक झलक पेश की है। उन्होंने ऐसी एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने एक सरप्राइज बर्थडे सेलिब्रेशन का आयोजन किया था, जिससे टाटा "अजीब" महसूस कर रहे थे। दरअसल, नायडू ने टाटा के साथ हैदराबाद में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने के लिए उनके सहायक के तौर पर गए थे।
यह शादी रतन टाटा के जन्मदिन के एक दिन बाद थी। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए नायडू ने आधी रात को अपने होटल के कमरे में दो कपकेक और एक मोमबत्ती तैयार रखने का प्रबंध किया। टाटा को आधी रात तक जगाए रखने के उनके प्रयासों के बावजूद, उन्हें रात 11:45 बजे अपनी इस सरप्राइज का खुलासा करना पड़ा।
दरअसल, रतन टाटा के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर नायडू और टाटा के "अच्छे दोस्तों" में से एक और उनके फ्लाइट क्रू का हिस्सा विटिन उनके होटल के कमरे में उनके साथ बैठकर बातचीत कर रहे थे। रात करीब 11 बजे नायडू और विनीत को लगा कि रतन टाटा को नींद आ रही है। उन्होंने किसी न किसी बहाने से बातचीत जारी रखी।
ताकि, वह रतन टाटा को सरप्राइज कर सके। हालांकि, रात 11.45 बजे नायडू ने हार मान ली और कबूल किया कि उन्होंने आधी रात का सरप्राइज रखा है। नायडू ने बताया कि जब कपकेक लाए गए तो रतन टाटा 'काफी असहज' थे। उन्होंने अपने दो दोस्तों से जन्मदिन का गीत न गाने का अनुरोध भी किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
शांतनु नायडू ने बताया कि उन्होंने कोई बड़ी जन्मदिन पार्टी आयोजित नहीं की थी, क्योंकि रतन टाटा ऐसे व्यक्ति थे जो कुछ करीबी दोस्तों के साथ निजी समारोहों को अधिक महत्व देते हैं। बता दें कि रतन टाटा और शांतनु नायडू के बीच आपसी सम्मान और समझ का रिश्ता था।












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