Rang Mahal: अयोध्या का वो रहस्यमी मंदिर जहां सिर्फ मां सीता की 'सत्ता'! पुजारी बनते हैं सखी, 26 वर्षों से गाय
Rang Mahal Temple: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर राम मंदिर मंदिर निर्माण के साथ अयोध्य़ को भव्य और दिव्य रूप दिया जा रहा है। इस बीच अयोध्या में हमेशा से चर्चा में रहे पौराणिक मंदिरों का भी जिक्र जरूरी है। श्री राम जन्मभूमि के विशाल परिसर से सटा हुआ अयोध्या को रंगमहल कई रहस्यों को समेटे हुए है। मंदिर परिसर में रहने वाली गाय जिसे सरयू नाम दिया है, लगातार मंदिर के करीब परिक्रमा करती है। अयोध्या में यह इकलौता मंदिर हैं, जहां मां सीता की सत्ता चलती है।
25 से वर्षों से परिक्रमा कर रही 'सरयू'
श्रीरामलला के मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। इस बीच सरयू के परिक्रमा भी अनवरत चल रही है। पिछले 25 वर्षो से यह जन्मभूमि की परिक्रमा कर रही है। महंत कृष्णकुमार दास के मुताबिक, रंगमहल की गौशाला में आने के बाद से सरयू गाय एक वर्ष तक अपनी मां के साथ गौशाला में रही। एक वर्ष बाद सरयू गाय को उसकी मां के साथ चरने के छोडा जाता था। सभी गाय रंगमहल गौशाला से निकल कर इधर-उधर जाती थीं लेकिन सरयू गाय बचपन से ही श्रीराम जन्मभूमि की ओर जाती थी और श्रीराम जन्मभूमि की परिक्रमा करने लगती थी। उस समय उस भूमि पर बाबरी ढांचा खड़ा था, उस ढांचे के पास की भूमि पर सरयू परिक्रमा करती थी।

प्रतिदिन 108 परिक्रमा
श्रीराम जन्मभूमि पास की मंदिर की गोशाला में सरयू गाय प्रतिदिन 108 परिक्रमा करती है। इस गाय को परिक्रमा करते हुए अयोध्याजी के लोगों ने, संतों ने और जन्मभूमि की सुरक्षा करने वाले सुरक्षाकर्मियों ने देखा है। मंदिर प्रशासन की मानें तो पिछले कई वर्षो में आधुनिक विज्ञान के मानने वाले कुछ लोगों ने इसपर शोध पर भी किया लेकिन श्रीराम और इस गाय के बीच के सम्बंधों को लेकर अब तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया।
पुजारी खुद को मानते हैं सखी
ऐसा माना जाता है कि पूर्व में यह मंदिर राजमहल का आंगन था। ऐसे में यह मंदिर में माता जानकी (सीता माता) की प्रधान पीठ है। यहां रामलला की पूजा दूल्हे के रूप में होती है। पुजारी अपने सिर पर आंचल लेकर खुद को मां जानकी को अपनी सखी मानते हुए पूजन अर्चन करते हैं।












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