कारगिल शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के पिता ने गुरमेहर को धमकी देने वालों को फटकारा
कारगिल शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के पिता डॉक्टर एनके कालिया ने रामजस विवाद पर दिया बयान। कहा हर जाति और हर तबके की महिलाओं का होना चाहिए सम्मान। गुरमेहर को मिलीं रेप की धमकियों को बताया गलत सोच।
पालमपुर। कारगिल के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के पिता ने रामजस विवाद में बयान दिया है। हिमाचल के पालमपुर में रह रह डॉक्टर एनके कालिया ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर को मिल रही रेप की धमकियों को गलत करार दिया है।

हर महिला सम्मान की हकदार
डॉक्टर एनके कालिया ने कहा कोई भी महिला सम्मान की हकदार है चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या फिर किसी भी तबके से आती हो। जिसने भी गुरमेहर को रेप की धमकी देने का अपराध किया है, उसे कानूनों के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। गुरमेहर कौर शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी हैं और रामजस में शुरू हुए विवाद के बाद से ही वह सुर्खियों में हैं। मंगलवार को हालांकि गुरमेहर ने खुद को इस पूरे कैंपेन से अलग कर लिया। उन्होंने शाम को ट्विटर पर लोगों से अपील की कि उनके परिवार की निजता का सम्मान किया जाए। गुरमेहर को दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई गई है। लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा गुरमेहर जालंधर की रहने वाली हैं। पिछले वर्ष उन्होंने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पिता की जान पाकिस्तान ने नहीं ली बल्कि युद्ध ने ली है।
कौन थे कैप्टन सौरभ कालिया
वर्ष 1999 में हुआ कारगिल युद्ध न सिर्फ पाकिस्तान पर भारत की विजय गाथा का उदाहरण है बल्कि इसके साथ ही उन तमाम शहीदों का जिक्र भी होता है जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सबकुछ दे दिया। जाट रेजीमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया और उनके पांच साथी जवान इस युद्ध में शहीद होने वाले बहादुरों में सबसे पहला नाम बन गए थे। मई 1999 में कारगिल वॉर के आधिकारिक शुरुआत से पहले ही पाक सेना ने कैप्टन कालिया और उनके साथ पेट्रोलिंग पर गए पांच जवानों को अगवा कर लिया था। इसके बाद उन्हें काफी बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया। 6 जून को कैप्टन कालिया और उनके साथी जवानों के शव मिले थे। शहीद कालिया की उम्र सिर्फ 22 वर्ष थी जब वह शहीद हुए थे। उनके पिता और उनके कोर्समेट्स को आज तक याद है कि बाकी यंगस्टर्स की ही तरह शहीद कालिया भी अपनी पहली सैलरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन वह अपनी पहली सैलरी लेने से पहले ही शहीद हो गए थे।












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