Rakesh Sharma: 41 साल पहले अंतरिक्ष में भरी थी 'विश्वास की छलांग', पढ़िए राकेश शर्मा की सफलता की पूरी कहानी
Rakesh Sharma: कभी-कभी जब हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो याद करते हैं अतीत की उन सुनहरी स्मृतियों और गाथाओं को जिसने हमें हर बार गौरवान्वित महसूस कराता है। हमारे इतिहास में कुछ ऐसे भी दिन है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनसे ताउम्र प्रेरणा लि जा सकती है।
3 अप्रैल का दिन भारत के लिए बेहद खास है। 41 साल पहले आज ही के दिन एक भारतीय ने अंतरिक्ष से कहा था सारे जहां से अच्छा..।

दो अप्रैल, 1984 जब भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में अपना पहला कदम रखा था तब पूरी दुनियां की निगाहें भारत पर थी क्योंकि उस समय तक हम विज्ञान की दुनिया के कच्चे खिलाड़ी थे। तत्कालीन स्क्वानड्रन लीडर शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष बने थे।
Rakesh Sharma astronaut: आज ही के दिन भरी उड़ान
आज भले ही भारत विज्ञान के क्षेत्र में शानदार तरक्की कर ली हो लेकिन 41 साल पहल तक ये महज एक सपना लगता था। इन कई सालों में हम अंतरिक्ष के खिलाड़ी बन चुके हैं। पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से लेकर पहला मंगलयान भेजने तक का सफर और अब गगनयान की तैयारी इसकी गवाह है।
13 जनवरी 1949 को पटियाला में जन्में राकेश शर्मा ने सोवियत इंटरकोसमोस के साथ 3 अप्रैल 1984 को सोयुज टी-11 में अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। इसी के साथ अंतरिक्ष में जाने वाले वह एक अकेले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए। यह अभियान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और सोवियत इंटर कॉस्मॉस का ज्वाइंट स्पेस प्रोग्राम था।
इस अभियान के तहत शर्मा ने दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेस में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे। इस दौरान उन्होंने वहां पर कई रिसर्च किया जिसने उसके बाद के भारत के कई अंतरिक्ष कार्यक्रमों में महत्तवपूर्ण योगदान निभाया।
Rakesh Sharma: 1971 की जंग में दिखाई थी आसमान की ताकत
साल 1970, जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा था उस समय देश ने इतनी तरक्की नहीं की थी। तब वायुसेना के एक नवजवान ने मिग-21 से दुश्मनों को आसमान की ताकत से परिचय कराया। उस दौरान राकेश शर्मा महज 22 साल के थे और 1970 में ही एयरफोर्स में बतौर पायलट ज्वाइन किया था।
राकेश शर्मा जब 25 साल के थे, तभी एयरफोर्स के सबसे बेहतरीन पायलट बन गए थे। 1982 में राकेश शर्मा को दो दर्जन से ज्यादा फाइटर पायलटों के टेस्ट के बाद अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुना गया था।
Rakesh Sharma Throwback: उड़ान से पहले कड़ी मेहन
41 साल पहले राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में विश्वास की ऊंची छलांग लगाई थी। राकेश शर्मा और रविश मल्होत्रा को 50 फाइटर पायलटों में टेस्ट के बाद चुना गया और ट्रेनिंग के लिए रुस भेजा गया था। अंतरिक्ष में जाने से एक साल पहले राकेश शर्मा और रवीश मल्होत्रा मॉस्को से 70 किलोमीटर दूर स्टार सिटी गए जहां अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षित किया जाता था।
एक इंटरव्यू के दौरान राकेश शर्मा ने कहा था कि, हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती रुसी भाषा सिखने की थी। हर दिन छ से सात घंटे तक रुसी भाषा की ट्रेनिंग ली थी। वहां का मौसम काफी ठंडा था, बर्फ की इमारतों में एक से दूसरी इमारत तक पैदल चल कर जाना होता था।
Throwback Astronaut Rakesh Sharma: अंतरिक्ष में किया योग
राकेश शर्मा के लिए ये मिशन कोई बहुत मुश्किल नहीं था। वो उस समय स्पेस में जाने वाले 128वें स्पेस यात्री थें। उन्होंने स्पेस में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को कम करने के लिए योगा किया था। अंतरिक्ष से सोयूज टी-11 की क्रू के साथ ज्वॉइंट कॉन्फ्रेंस के जरिए देश ने पहली बार अंतरिक्ष में मौजूद अपने नागरिक के साथ बात की थी। उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा ने पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? उन्होंने हिंदी में जवाब दिया था- सारे जहां से अच्छा।
अंतरिक्ष से लौटने के बाद शर्मा को सोवियत संघ के हीरो का सम्मान दिया गया था। वह आज तक ये पुरस्तकार पाने वाले पहले भारतीय हैं। इस मिशन की सफलता के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि लंबे समय तक भारत के पास अपनी कोई मानव अंतरिक्ष यात्रा नहीं होने वाली है। राकेश शर्मा अंतरिक्ष जाने वाले इकलौते भारतीय बने रहेंगे।
ISRO: स्पेस में भारत की बढ़त
भले ही 1984 के भारत के पास विज्ञान और तकनीकि की कमी थी लेकिन बीते इन चार दशकों में देश ने कई सफल अंतरिक्ष अभियानों को पूरा किया है। 2014 में भारत ने बेहद कम लागत और पहले ही प्रयास में मगंल की कक्ष में फतह की थी। मंगलयान इसरो के सबसे सफल अभियानों में एक है। मंगलयान अपनी अवधि पूरी होने जाने के बावजूद लगातार काम कर रहा है।
इसके बाद चंद्रयान मिशन को अंजाम दिया। इसरो अब गगनयान की तैयारी में जुटा है। इसके अलावा इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने कई छोटी-बड़ी मिसाइलों का सफल प्रशिक्षण किया है जिसने अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में महत्तवपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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