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Rajya Sabha MP: राज्यसभा सांसदों की कितनी होती है सैलरी, जानें भत्ते और MPLADS फंड का पूरा गणित

Rajya Sabha MP facilities: देश में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित रूप से राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर राज्यसभा सांसद की भूमिका क्या होती है।

लोकसभा सांसदों की तरह उनका कोई निश्चित संसदीय क्षेत्र नहीं होता, फिर भी वे विकास कार्य कैसे कराते हैं और उन्हें कितनी सैलरी व सुविधाएं मिलती हैं।

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आइए विस्तार से समझते हैं कि राज्यसभा सांसद बनने की प्रक्रिया क्या है, उनकी जिम्मेदारियां क्या होती हैं और उन्हें मिलने वाली सैलरी, भत्ते व विकास फंड का पूरा गणित क्या है।Rajya Sabha MP का चयन कैसे होते है, क्या है वोटिंग का गणित?

राज्यसभा सांसद कैसे बनते हैं?

पहले समझते हैं कैसे चुना जाता है राज्यसभा का सांसद? लोकसभा सांसदों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है, लेकिन राज्यसभा सांसदों का चुनाव अलग प्रक्रिया से होता है। राज्यसभा के लिए चुनाव में आम जनता वोट नहीं करती, बल्कि संबंधित राज्य की विधानसभा के विधायक मतदान करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम (STV) अपनाया जाता है। इसमें उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर वोट दिए जाते हैं। जीत के लिए जरूरी वोटों की संख्या निकालने के लिए एक खास फार्मूला लागू किया जाता है।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी राज्य में 11 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है तो पहले सीटों की संख्या में 1 जोड़ दिया जाता है। यानी 11+1 = 12। इसके बाद राज्य की कुल विधानसभा सीटों को 12 से भाग दिया जाता है। फॉर्मूला: [कुल विधानसभा सीटें / (राज्यसभा की खाली सीटें + 1)] + 1

Rajya Sabha MP Salary: राज्यसभा सांसद की कितनी होती है सैलरी?

पिछले साल संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की सैलरी में बढ़ोतरी की गई थी। अब सांसदों को 1.24 लाख रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। इसके अलावा उन्हें 2,500 रुपये प्रतिदिन का दैनिक भत्ता भी दिया जाता है। इसके साथ ही सांसदों को कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • दिल्ली में सरकारी आवास
  • मुफ्त या सब्सिडी वाली यात्रा सुविधा
  • टेलीफोन और इंटरनेट सुविधा
  • कार्यालय और स्टाफ की व्यवस्था
  • चिकित्सा सुविधा

पूर्व सांसदों को कितनी मिलती है पेंशन?

सरकार ने पूर्व सांसदों की पेंशन भी बढ़ाई है। अब पूर्व सांसदों को 31,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है। अगर कोई सांसद पांच साल से ज्यादा समय तक संसद का सदस्य रहा है तो प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए 2,500 रुपये अतिरिक्त पेंशन भी दी जाती है।

Rajya Sabha MP Allowances: बिना 'सीट' के कहां खर्च होता है विकास फंड ?

लोकसभा सांसद के पास एक निश्चित संसदीय क्षेत्र जैसे वाराणसी या पटना होता है, लेकिन राज्यसभा सांसद पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करता है।राज्यसभा सांसद अपने राज्य के किसी भी जिले या क्षेत्र में विकास कार्य करवा सकता है। वे अपने फंड का आवंटन अपनी पसंद के अनुसार राज्य के किसी भी हिस्से में कर सकते हैं। इन्हें भी लोकसभा सांसदों की तरह विकास कार्यों के लिए सालाना एक निश्चित राशि साल में ₹5 करोड़ मिलती है, जिसे वे जिला प्रशासन के जरिए स्कूल, सड़क या सामुदायिक भवन जैसे कार्यों में खर्च करते हैं।

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राज्यसभा सांसद की कितनी अहम है भूमिका और क्या हैं शक्तियां?

राज्यसभा को ऊपरी सदन (House of Elders) कहा जाता है। इनके पास कानून बनाने की शक्तियां होती हैं। राज्यसभा सांसद कानून बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी सामान्य विधेयक (Ordinary Bill) को पास होने के लिए राज्यसभा की मंजूरी अनिवार्य है बस वित्त विधेयक (Money Bill) में राज्यसभा की भूमिका सीमित है। वे धन विधेयक पर चर्चा तो कर सकते हैं, लेकिन उसे रोक नहीं सकते। 14 दिनों के भीतर उन्हें इसे वापस करना होता है।

संविधान में बदलाव के लिए राज्यसभा के पास लोकसभा के समान ही शक्तियां हैं। राज्यसभा सांसद कानून बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्यसभा के सदस्य कई विधेयकों पर चर्चा करते हैं, सुझाव देते हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाते हैं।

हालांकि वित्त विधेयक (Money Bill) के मामले में राज्यसभा की भूमिका सीमित होती है। ऐसे विधेयक लोकसभा में ही तय होते हैं और राज्यसभा सिर्फ सुझाव दे सकती है। इसके अलावा राज्यसभा सांसद संसद की विभिन्न समितियों में भी शामिल होकर नीतियों और योजनाओं की समीक्षा करते हैं। चूंकि वे राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं, इसलिए उनका मुख्य कार्य केंद्र में अपने राज्य के हितों की आवाज उठाना होता है।

क्यों अहम मानी जाती है राज्यसभा की भूमिका?

भले ही राज्यसभा सांसद सीधे जनता के बीच से नहीं आते, लेकिन कानून बनाने की प्रक्रिया और राज्यों के विकास में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नीतीश कुमार का यह संकल्प कि वे "बिहार के विकास पर कायम रहेंगे", राज्यसभा के उसी संवैधानिक अधिकार की ओर इशारा करता है जहां सांसद पूरे राज्य का संरक्षक होता है। राज्यसभा को भारतीय लोकतंत्र में स्थिरता और अनुभव का सदन माना जाता है।

यहां ऐसे नेता भी पहुंचते हैं जो सीधे चुनाव नहीं लड़ते लेकिन नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। नीतीश कुमार, जॉर्ज फर्नांडिस, शरद पवार जैसे कई बड़े नेता राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में अनुभवी नेताओं का राज्यसभा की ओर रुख करते हैं, तो इसे सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

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