राज्यसभा चुनाव 2022: भाजपा के लिए क्या हैं इस जीत के मायने?
नई दिल्ली, 11 जून: चार राज्यों में हुए राज्यसभा चुनाव में राजस्थान को छोड़ दिया जाए तो बाकी तीनों राज्यों हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अतिरिक्त सीट पर भाजपा को जीत मिली है। निर्दलीय उम्मीदवारों से समर्थन, क्रॉस वोटिंग और अपने प्रतिद्वंद्वियों में आंतरिक कलह का लाभ उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी जीत हासिल करने में कामयाब रही। सिर्फ राजस्थान में ही भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा को हार मिली है।
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भाजपा ने इस चुनाव में छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने पक्ष में वोट करने के लिए मनाने की अपनी क्षमता साबित की है। यह राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनावों से पहले पार्टी के लिए हौसला बढ़ाने वाला है। 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए सरकार आवश्यक बहुमत के निशान से थोड़ा नीचे है। उसको अन्य दलों, बीजद और वाईएसआरसीपी जैसी पार्टी के सहारे की जरूरत होगी।
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र में पार्टी को भी बढ़ावा दिया है, जहां वह एक अतिरिक्त सीट हासिल करने में सफल रही। राज्य से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अलावा, अनिल बोंडे और धनंजय महादिक महाराष्ट्र से उच्च सदन के लिए चुने गए। भाजपा ने कर्नाटक में तीन सीटें और हरियाणा में एक अतिरिक्त सीट जीतने में कामयाबी पाई। कर्नाटक में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, जगेश और लहर सिंह सिरोया जीते हैं।
राजस्थान में जरूर लगा झटका
राजस्थान और हरियाणा में, जहां पार्टी के पास एक उम्मीदवार के चुनाव के लिए पर्याप्त वोट थे, पार्टी ने सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा को निर्दलीय के रूप में उतारा। हरियाणा से शर्मा जीत गए लेकिन चंद्रा राजस्थान में हार गए। राजस्थान में भाजपा को इसलिए भी झटका लगा क्योंकि उनकी विधायक शोभरानी कुशवाहा ने पार्टी के खिलाफ वोट की। जिससे राजस्थान में पार्टी की गुटबाजी भी सामने आ गई। इस वोटिंग के लिए पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर उंगली उठ रही है।
कर्नाटक में भाजपा को कांग्रेस और जेडीएस के बीच के मतभेदों से फायदा हुआ। यहां 121 विधायकों वाली भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट जीतने की उम्मीद थी। चौथी सीट के लिए कड़ी टक्कर की उम्मीद थी। जिसमें बीजेपी जीत गई।
उच्च सदन में बीजेपी की ताकत
पार्टी ने शुक्रवार को हुए मतदान में राज्यसभा की 16 सीटों में से आठ पर जीत हासिल की। उसने कर्नाटक और महाराष्ट्र में तीन, हरियाणा में एक और राजस्थान में एक सीट जीती। हरियाणा में उसके समर्थन से एक निर्दलीय ने जीत हासिल की। उच्च सदन में भाजपा की ताकत अब 95 (निर्दलीय सहित) होगी। 3 जून को पार्टी ने अपनी संख्या में 14 सदस्यों को जोड़ा जब सभी दलों के 41 उम्मीदवार निर्विरोध उच्च सदन के लिए चुने गए। कुल 57 खाली सीटों में से 24 भाजपा से थीं, पार्टी ने 23 (निर्दलीय सहित) सीट फिर से पाई हैं।












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