Rajya Sabha Chunav: ओडिशा में तीनों सीटें जीत सकता था BJD, फिर BJP के अश्विनी वैष्णव के समर्थन की वजह?
ओडिशा में लोकसभा चुनावों के साथ इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। यहां मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का बीजू जनता दल (BJD) सत्ता में है और बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी। लेकिन, दोनों दलों के बीच अजीब सी ट्यूनिंग देखकर बड़े-बड़े नेता भी गच्चा खा रहे हैं।
27 फरवरी को होने जा रहे राज्यसभा चुनावों में ओडिशा से उम्मीदवारों की लिस्ट देखकर भी वही लग रहा है। लोग चकमा खा गए हैं। राज्य से अभी 3 राज्यसभा सीटें भरी जानी हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से बीजेडी के पास तीनों सीटें जीतने लायक पर्याप्त आंकड़े हैं।

तीन में से एक सीट पर बीजेडी देगा बीजेपी को समर्थन
लेकिन, नवीन पटनायक की पार्टी ने बीजेपी उम्मीदवार और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को समर्थन देने का फैसला किया है। मतलब, बीजेडी ने सिर्फ दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, तीसरी सीट पर पार्टी के विधायक अश्विनी वैष्णव के लिए वोट करेंगे।
बीजू जनता दल ने सुभाशीष खुंटिया और देबाशीष सामंतराय को अपना प्रत्याशी बनाया है। तीसरी सीट के लिए अश्विनी वैष्णव भाजपा के प्रत्याशी हैं।
जबकि, 147 सदस्यों वाली ओडिशा विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के सिर्फ 22 ही एमएलए हैं। मतलब, रेल मंत्री की जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजेपी को 15 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता थी, जो बिना बीजेडी के समर्थन के मुमकिन नहीं था।
पिछली बार अश्विनी वैष्णव को मिला था बीजेपी का समर्थन
वहीं, बीजेडी के 108 विधायक हैं और यह तीनों सीटों पर कब्जे के लिए पर्याप्त है। लेकिन, फिर भी पार्टी ने मुख्य विपक्षी दल के उम्मीदवार पर दांव खेला है। अगर इतिहास देखें तो वैष्णव के साथ पिछली बार भी लगभग यही स्थिति बनी थी।
वे शुरू में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतरे थे और उन्हें बीजेपी और बीजेडी दोनों साथ दे रहे थे। लेकिन, आखिरी वक्त में बीजेपी ने बीजेडी से उन्हें भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर समर्थन मांगा और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इसके लिए तैयार हो गए।
पीएम मोदी और सीएम पटनायक में भी दिख चुकी है ट्यूनिंग
कुछ महीने गुजरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक एयरपोर्ट की आधारशिला रखने ओडिशा पहुंचे थे। वहीं सीएम पटनायक भी मौजूद थे और उन्होंने यह विश्वास जताया था कि जब यह प्रोजेक्ट पूरा होगा और इसका उद्घाटन होगा तो मोदी ही प्रधानमंत्री रहेंगे। इसके बाद पीएम मोदी संबलपुर में एक जनसभा में पहुंचे तो पटनायक को अपने 'मित्र' बता दिया।
राज्यसभा में बीजू जनता दल बना रहा है सरकार की ढाल
यह सिलसिला एक बार का नहीं है। राज्यसभा में जब भी किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर मोदी सरकार को समर्थन की जरूरत पड़ी है, बीजेडी ने ढाल की तरह उसका साथ दिया है। जबकि, राज्य में बीजेपी, उसके खिलाफ रहती है।
कांग्रेस को लग रहा है दोनों में साठ-गांठ
बीजेपी और बीजेडी का यह अजीब रिश्ता कांग्रेस को काफी ज्यादा खटकता है। ओडिशा में पार्टी के प्रभारी महासचिव अजॉय कुमार ने एक्स पर पोस्ट में लिखा है, 'बीजेडी हमेशा बीजेपी को समर्थन देती है। अब ओडिशा समझता है कि सीबीआई-ईडी ने सीएम और उनके करीबी वीके पांडियन पर छापा क्यों नहीं मारा है, जबकि राज्य ने बड़े घोटाले देखे हैं।'
नवीन पटनायक जवाब देंगे क्यों दिया समर्थन- प्रदेश बीजेपी
दूसरी तरफ प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष मनमोहन सामल का कहना है कि राज्य में बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाएगी और बीजेडी के साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं है।
उनके मुताबिक, 'हमने एक उम्मीदवार उतारा। हमें जीत का भरोसा है। नवीन पटनायक को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने हमारे उम्मीदवार का समर्थन क्यों किया। चुनावों में किसी का समर्थन लेने से हम इनकार नहीं कर सकते। लेकिन, इससे नवीन सरकार के खिलाफ लड़ाई की बीजेपी की प्रतिबद्धता कम नहीं होगी।'
तो इस वजह से बीजेडी ने बीजेपी उम्मीदवार को दिया समर्थन ?
बीजेडी ने भी भाजपा के साथ किसी तरह के गठबंधन से इनकार किया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद मुन्ना खान ने कहा कि वैष्णव रेलवे और टेलिकॉम क्षेत्र में व्यापक विकास के हित में हैं और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य को केंद्र से मिलने वाले फंड का आवंटन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।












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